आश्रय गृह में रह रहे दलित परिवारों का खाना, चिकित्सा एवं उचित देखभाल से प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

ढाक का तीन पात, 12 दिन धरणा देने एवं दिल्ली तथा रॉची से एससी आयोग के अध्यक्ष आने पर प्रशासन की तंद्रा भंग हुई थी
जामताड़ा से राज किशोर सिंह की रिपोर्ट
जामताड़ा : नारायणपुर थाना क्षेत्र के चिरूडीह गांव के पांच पीड़ित दलित परिवार को गांव के कथित दबंगों रामजान मियॉ समेत अन्य द्वारा निकाले जाने के 66 दिन गुजरने को है। लेकिन अब तक यह परिवार शरणार्थी बनकर जीवन जी रहा है। फिलहाल राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष अरूण हलदार के निर्देश पर पीड़ित दलित परिवार जिला प्रशासन की अभिरक्षा में है। इन्हें आश्रय गृह में रखा गया है। करीब 60 दिनों तक परिवार के लिए भोजन का प्रबंध होटल से किया गया था। लेकिन पिछले चार दिनों से इन्हें भोजन नहीं मिल रहा है। प्रशासन की ओर से चूल्हा.चौका दे दिया गया है। इसके अलावे चावल व दाल मुहैया करवा दिया गया है। लेकिन परिवार के कई बच्चें बीमार है। जिनके इलाज के लिए कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा है। वही परिवार की एक वृद्ध महिला का पैर मे फ्रेक्चर है। जिनका इलाज नहीं हो पा रहा है। छोटे छोटे आधा दर्जन के करीब बच्चे हैं जिन्हें देखने मात्र से लगता है इनके ऑख एवं नाक फुला हुआ एवं पानी चल रहा है। इसे भी चिकित्सा की आवष्कता है। लेकिन सभी मौन हैं। इधर परिवार के कालीपद तुरी का कहना है कि प्रशासन ने दावा किया था कि आरोपी दबंग परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जिसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इतना ही नहीं अब भोजन में कटौती कर लिया गया है। महिलाएं गैस.चूल्हा में भोजन पकाने से डरती है। इन्हें लग रहा है कि गैस चूल्हा बंद नहीं और लिकेज हो गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। हलॉकि इसे लेकर पीडित परिवारों के सदस्यों द्वारा डीसी फैज अक अहमद मुमताज को फोन कर अपने साथ हो रहे बातों को बताने की कोषिष की गई तो थोड़ा सुनने के पष्चात डीसी का मोबाइल अनरिचेबुल हो गया।

डीसी ने मोबाइल नहीं उठाया

चिरूडीह गॉव के रामजान मियॉ एवं अन्य के शिकार हुए दलित परिवारों को आश्रय गृह में न खाना एवं चिकित्सा एवं बच्चों के उचित देखभाल एवं दवा के लिए डीसी से बात करना चाहे तो डीसी फैज ने मोबाइल नहीं उठाया। फलतः डीसी फैज की बातों का उल्लेख नहीं किया जा सका।

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