डायन कुप्रथा उन्मूलन जागरूकता रथ को झंडी दिखा उपायुक्त ने किया रवाना

सरायकेला से भाग्य सागर सिंह की रिपोर्ट

सरायकेला। समाहरणालय परिसर से बुधवार को उपायुक्त अरवा राजकमल द्वारा डायन कुप्रथा के उन्मूलन हेतु जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखा कर क्षेत्र में रवाना किया गया। मौके पर उपायुक्त ने कहा कि जिलावासियों को जागरूक करने के उद्देश्य से डायन कुप्रथा के उन्मूलन हेतु हर स्तर पर प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा डायन कुप्रथा समाज के लिए सबसे बड़ा अभिषाप है। इस कुप्रथा को दूर करने के लिए सरकार व जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से जागरूकता अभियान के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। महिलाओं को सशक्त व स्वाबलंबी बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसमें सखी मण्डल की दीदियों का भी पूर्ण सहयोग लिया जाय जिनके द्वारा अपने क्षेत्र के लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिसके वृहद प्रचार प्रसार हेतु सरायकेला अनुमंडल एवं चंडिल अनुमंडल के लिए प्रचार प्रसार वाहन रवाना किया गया। हर प्रखंड मे 3-3 दिन दौरा कर सभी पंचायत मे प्रचार प्रसार किया जायेगा। उपायुक्त ने जिले के सभी माताओ बहनो से अपील करते हुए कहा कि डायन प्रथा जैसे मानसिक कुरीतियों को समाज से पूर्ण रूप से खत्म करने में अपना हर संभव योगदान सुनिश्चित करें। अपने आस पास की वैसी महिला जो अकेली है उन्हें सहयोग दे ताकि उन्हें इस प्रकार की कुरीतिओं का सामना ना करना पड़े। उपायुक्त ने कहा किसी महिला को डायन कहना या उसके डायन की अफवाह फैलाना या उसे डायन कहने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाना अथवा किसी महिला को डायन घोषित कर उसे शारीरिक या मानसिक कष्ट देना कानूनन जुर्म है। डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 1999 के अनुसार धारा 3 के तहत डायन का पहचान करने वाले या कहने वालो को-3 महीने की सजा या रु1000/-जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 4 डायन बता कर किसी को प्रताड़ित कराना-6 महीना की सजा या रु 2000/-जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 5 डायन चिन्हित करने में जो व्यक्ति उकसायेगा-3 महीने की सजा या रु 1000/- जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 6 भूत-प्रेत झाड़ने की क्रिया-1 साल की सजा या रु 2000/- जुर्माना या दोनों का प्रावधान है एवं इस अधिनियम की सभी धाराएँ संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं एवं अजमानतीय है।