चौपारण के जोकट गांव में मौत पर भारी पड़ी आस्था का महापर्व

95 वर्षीया वृद्धा का निधन के बाद एक कमरे में शव को रख कर घर के दूसरे कमरे में किया जा रहा था पूजा

चौपारण से बिपिन बिहारी पाण्डेय

चौपारण (हजारीबाग) : लोक आस्था और श्रद्धा का महान पर्व छठ पूजा के प्रति आस्था इतनी अधिक है कि जन्म और मरण जैसे शाश्वत सत्य को भी चार दिवसीय महापर्व पर महत्व नहीं दिया जाता। यह बात हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के जोकट गांव में चरितार्थ होते देखा गया। जहां मौत पर भी आस्था का महापर्व भारी रहा। दरअसल जोकट ग्राम निवासी महरू ठाकुर के घर में पर्व का आयोजन हुआ। खरना के दिन उनकी करीब 95 वर्षीया वृद्ध मां सत्या देवी ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण के बाद वे अपने कमरे में रात में सो गई। बुधवार की सुबह पहला अर्घ्य के दिन जब उनकी मां ने कमरा नहीं खोली तो परिजनों ने दरवाजा तोडा कर अंदर देखा तो वृद्धा मृत अवस्था में पडी थी। इधर मां को मृत अवस्था में देखकर पुत्र महरू ठाकुर और राजेंद्र ठाकुर सहित पूरा परिवार पेशोपेश में पड गये। एक तरफ छठ महापर्व की पूजा तो दुसरी ओर जन्म देने वाली मां का शव था। परिजनों ने दुख की बेला में भी छठ पूजा को अधिक महत्व देते हुए मां के शव को कमरे में रखकर पूजा को जारी रखा। गुरुवार की सुबह उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य के साथ जब पूजा संपन्न हुआ तो परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार किया। वृद्ध महिला के मृत्यु के बाद लगभग तीस घंटे के बाद अंतिम संस्कार किया गया। उनके शव यात्रा में भारी संख्या लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने बताया कि छठ माता की महिमा निराली है। सब कुछ उनकी ही मर्जी से होता है।