सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु एवं अखंड दांपत्य जीवन की कामना के साथ सुनी सती सावित्री की कथा

लौकेश सिंह की रिपोर्ट

मनातू: मनातू प्रखंड के विभिन्न गांव में सौभाग्यवती महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति पुत्र की दीर्घायु के साथ अखंड दांपत्य जीवन की कामना की अधिकतर सुहागिन महिलाओं ने सती सावित्री और सत्यवान की कथा भी सुनी। वट वृक्ष के नीचे अनेको महिलाओं ने कोरोना का नकार आस्था पर विश्वास की। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को किया जाता है। युगो से चली आ रही यह व्रत वटवृक्ष बरगद पीपल के पेड़ के नीचे किया जाता रहा है। ऐसी मान्यता है की वट वृक्ष की मूल जड़ में ब्रह्मा, मध्य भाग में विष्णु एवं अग्रभाग में शिव का निवास स्थान माना जाता है। इसलिए यह वृक्ष देव वृक्ष के नाम से भी जाना जाता रहा है। यह वृक्ष कई सालों तक जीवित रहता है इसलिए सुहागिन महिलाएं अपने पति पुत्र की दीर्घायु होने की कामना करती है। वट वृक्ष में मां सावित्री का भी निवास स्थान है।
सौभाग्यवती स्त्रियां वटवृक्ष की चारों ओर रक्षा सूत्र बांधकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इस कोरोना काल में सुहागिन महिलाएं आस्था पर भारी पड़ी। मनातू प्रखंड के गांव गांव में सौभाग्यवती स्त्रियां वट वृक्ष की पूजा करती देखी गई। मौके पर गोपाल पाठक एवं उनके परिवार वालों ने जगह जगह पर सती सावित्री सत्यवान की कथा के साथ विधिवत पूजा-अर्चना करवाई। इस बीच मनातू के जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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