विहिप व बजरंग दल ने सरहूल एवं रामनवमी पर जुलूस नहीं निकालने के आदेश का किया विरोध

बसंत कुमार गुप्ता

गुमला। विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल के प्रखंड सह मंत्री सत्यनारायण भगत ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर,सरहुल व रामनवमी पर्व के दौरान जुलूस नही निकाले जाने के झारखंड सरकार के निर्णय का विरोध किया।
उन्होंने झारखंड सरकार के निर्णय की कड़ी निन्दा करते हुए कहा, कि सरना-सनातन धर्मावलंबियों के पवित्र त्यौहार रामनवमी और सरहुल में सदियों से जुलूस की परंपरा रही है। सरकार को जन भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। और दोनों त्यौहारों में जुलूस नही निकालने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। राज्य में देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा कोरोना संक्रमण की दर निम्न हैं। ऐसे में झारखंड के सरना सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं और परम्पराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। बीते दिनों झारखंड विधानसभा उप-चुनाव के वक्त राज्य के साथ देश में भी कोरोना संक्रमण का प्रकोप अपने चरम पर था। उस वक्त झारखंड की हेमंत सरकार ने जारी कोरोना गाइड लाइन को नजरंदाज कर सत्ताधारी झामुमो सरकार व मुख्यमंत्री के द्वारा अनेकों बड़ी रैलियां व जनसभाएं की गई। अन्य धर्म के धार्मिक त्यौहारों- कार्यक्रमों के दौरान हेमंत सरकार को महामारी गाइड लाइन की याद नही आती है। सरकार को जनता के बीच पक्षपात और तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठकर सभी के आस्था, श्रद्धा और विश्वास को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और रामनवमी और सरहुल पर्व पर जुलूस निकालने की अनुमति देने की अपील की है।

वहीं विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल सिसई इकाई ने प्रेस वार्ता के दौरान बीते 21 मार्च को नागफेनी स्थित लोहरा-आदिवासी समाज के सम्मेलन के दौरान समाज के केन्द्रीय सचिव प्रीतम लोहरा के द्वारा लोहरा समाज के हिन्दू नही होने के बयान की कड़ी भर्त्सना करते हुए, हिन्दू सरना सनातन धर्म को तोड़ने वाले लोगों को गलत बयानबाजी से बचने की अपील की।
इस मौके पर लोहरा समाज के ही बजरंगी कार्यकर्त्ता कार्तिक विश्वकर्मा ने कहा, कि समाज के अगुवा बनकर हिन्दू नही होने की बात कहने वाले से हम पुछना चाहते हैं की लोहरा जाति के लोग अगर हिन्दू नही तो किस धर्म के हैं।
इस विषय पर लोहरा समाज के प्रखंड अध्यक्ष जीतू लोहरा ने कहा कि केन्द्रीय सचिव के बयान को अन्यत्र नहीं लें, उन्होंने समाज के जरुरतमंद लोगों के जाति प्रमाण पत्र नही बनने के कारण इस तरह का बयान दिया। सम्मेलन के दौरान ही उनके दिये बयान का विरोध करते हुए,सभी ने जाति प्रमाण पत्र नही बनने को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांग व बात रखने की बात कही।

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