सातवें दिन फिरौती की रकम चूकता कर विभूति घर लौटा

परिजन ने नहीं कराया था मामला दर्ज, अपहृत भी पुलिस को कुछ नहीं बताया, परिजन घटना के दुसरे दिन करमाटॉड़ थाना गये थे बाद में सीमा विवाद को लेकर परिजन व्हाट्सएप में करौं थाना को आवेदन देकर फिरौति का रकम लाखों लेकर देने चले गये
जामताड़ा से राज किशोर सिंह की रिपोर्ट
जामताड़ा :विगत 16 जून को करौं थाना क्षेत्र के सारंडा गॉव के समीप से विभूति भैया ग्राम पट्टाजोरिया थाना करमाटॉड़ को अज्ञात अपराधकर्मियों ने बंदूक की नोंक पर अगवा कर जामताड़ा चितरा होते हुए मिर्जाचोकी साहेबगंज ले गये थे। जहॉ से वीडियो कॉल कर अपहृत को प्रताड़ित करने का लाइव दिखाकर परिजनों का बोलती बंद कर दिया। हलॉकि घटना की खबर जब मीडिया तक पहुॅची तो जामताड़ा एवं देवघर के पुलिस अधीक्षक क्रमशः दीपक कुमार सिन्हा एवं धनंजय सिंह तक पहुॅची। बाद में संथाल परगना के आईजी एवं डीआईजी क्रमष प्रिया दुबे एवं सुदर्शन मंडल तक पहुॅची । उक्त पुलिस पदाधिकारियों ने भी संबंधित जिलों के एसपी को भी मामला पर कार्रवाई का निर्देश दिया। वहीं परिजनों ने पुलिस के समक्ष जाने से भलाई अपराधकर्मियों के पास ही रकम लेकर चले गये। हलॉकि पुलिस के रडार पर अपराधी थे। वाबजूद पुलिस ने सोचा कि पहले अपहृत का रिहाई हो जाये। फिर अपराधियों को दबोचने का काम किया जायेगा। इस बीच घंटो अपराधी एवं अपहृत के परिजन पौड़ेयाहाट स्थित एक लाइन होटल एवं पेट्रोल पंप के समीप जो डील हुआ। वह भी पुलिस जान रहीं थी। बाद में कुछ पैसा कम हाने पर देने में किचकिच एवं अन्य बात भी पुलिस जान रही थी। वहीं पुलिस के पास सर्वप्रथम मजबूरी थी कि एक में तो परिजनों के द्वारा पुलिस को किसी भी ढंग का सहयोग नहीं करना एवं संबंधित थाना में मामला दर्ज नहीं कराना। वहीं जब अपहरणकर्ता एवं अपहृत के बीच पैसों की लेनदेन हो गई थी एवं पॉच से छह दिनों तक अपराधियों के चंगूल में रहने एवं अंत में पैसा ले देकर छोड़ने की बात हुई। वैसे परिस्थिति में पुलिस अगर अपराधियों को पकड़ लेती तो ष्षेष अपराधी अपहृत को नुकषान पहुॅचा सकते थे। वहीं अगर परिजन जिस ढंग से अपराधियों के डर से पैसा देकर अपहृत को छुड़ाने के बाद पुलिस का अगर इन्फार्म कर देते तब नजारा कुछ और होता यहॉ तो वगैर एफआइआर का पुलिस ने जो अपने स्तर से जो अपराधियों एवं अपहृत के परिजनों का कहॉ गये कहॉ बैठे यह बहुत बड़ी बात है। फिलहाल अपहृत काफी डरा एवं सहमा हुआ है वह किसी को भी कुछ भी बताने से साफ परहेज कर रहा है। हलॉकि पुलिस को जो सूचना है उसमे अपराधियों ने अपहृत को मिर्जाचौकि के समीप किसी मकान में रखा था। वहीं अपहृत विभूति की मानें तो अपराधियों ने उन्हें उठाने के बाद लगभग सात घंटा तक गाड़ी को सड़क पर सरपट दौड़ाया उसके बाद एक जगह शिफ्ट कर दिया। जहॉ का लोकेशन तक भी अपहृत को मालूम नहीं है। हलॉकि अपहृत मात्र छह लाख रूपया देने की बात दबे जुबान से कबूल कर रहा है। वहीं उसके निकट लोगों से मिले सूत्रों पर यकिन करें तो लगभग तीस लाख रूपया फिरौति देकर छूटने की बात सामने आ रही है।