विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति ने की छतरपुर में पत्थर माइंस की जांच, कई कमियां आई सामने

पलामू से सुधीर कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

मेदिनीनगर: झारखंड विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति ने बुधवार को पलामू जिले के छतरपुर क्षेत्र के पत्थर खनन क्षेत्रों की जांच की. इस दौरान कई बड़ी कमियां सामने आयी. मामले में समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपकर कार्रवाई कराने का भरोसा स्थानीय लोगों को दिलाया।विदित हो कि छतरपुर की भाजपा विधायक पुष्पा देवी ने झारखंड विधानसभा में नियमों को ताक पर रखकर पत्थर खनन का मामला उठाया था. इसके आलोक विधानसभा सभा द्वारा गठित उच्चस्तरीय टीम और खनन विभाग के अधिकारियों के द्वारा बुधवार की दोपहर छतरपुर खनन प्रभावित क्षेत्र की जांच की गयी.जांच टीम में विधानसभा के प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के समिति के अध्यक्ष सह घाटशिला विधायक रामदास सोरेन, विधायक दशरथ गागराई, विकास कुमार मुंडा, समरी लाल और राजेश कच्छप शामिल थे. उनके साथ क्षेत्रीय विधायक पुष्पा देवी और पूर्व सांसद मनोज कुमार भी थे।रिपोर्ट के अनुसार विगत 15-20 वर्षों से छतरपुर में पत्थर खनन का काम चल रहा है. शुरुआती दिनों में अधिकारियों से लीज धारकों द्वारा गलत जानकारी के आधार पर लीज हासिल किया गया और अवैध खनन जारी है, जिसके भयंकर परिणाम सामने आ सकते हैं.

पर्यावरण और राजस्व के करोड़ों नुकसान के साथ-साथ पिछले लगभग 20 वर्षों से क्षेत्रों में गलत नीतियों और मानकों को न मानने से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 130 से ऊपर मौतें हुई हैं. लोग घातक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. वायु, ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है. मिट्टी प्रदूषण के साथ ही कृषि योग्य भूमि बंजर होती जा रही है.विधानसभा की समिति ने नौडीहा बाजार के आशीष सिंह की श्रेया माइंस, छतरपुर के मुनकेरी में अनिल सिंह के महादेवा कंस्ट्रक्शन और छतरपुर के बगैया गांव के लीज स्थलों पर जांच की, जिसमें नियमों को अनदेखी पाई गई.जांच टीम ने स्पष्ट रूप से माना कि नियमों को ताक पर रखकर खनन कार्य किया गया है. सारे मामलों में अनदेखी हुई है. इसमें आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. मौके पर छतरपुर एसडीओ नरेंद्र कुमार गुप्ता और प्रभावित ग्रामीण मौजूद थे।

क्या-क्या मामला आया सामने ?

विगत वर्षों में अवैध खनन के लिए बड़े पैमाने पर जंगल और झाड़ियों को काटा गया, जिसके फलस्वरूप जल स्तर में लगातार गिरावट आई है. क्षेत्र में जल संकट की गंभीर समस्या पैदा हो गई है.अवैध ढुलाई और परिवहन नियमों की अनदेखी से जहां करोड़ों के राजस्व की क्षति हुई है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों जाने चली गई. समय-समय पर पत्थर खनन पट्टा की जांच और निरीक्षण के नाम पर अधिकारियों की खानापूर्ति की वजह से समस्या बेहद गंभीर हो गई है.खतियान के अनुसार आवंटित क्षेत्र का किस्म स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है. कुछ क्षेत्र सर्वे खतियान रजिस्टर दो में जंगल झाड़ी के रूप में पाए गए. आवंटित क्षेत्र से सार्वजनिक स्थल की मानक दूरी में भी फेरबदल पाया गया।आवंटित क्षेत्र से ऊपर गुजर रहे हाईटेंशन तार का मामला भी प्रकाश में आया. बिना चालान के पत्थरों को ढोने का मामला और ओवरलोडिंग को भी चिन्हित किया गया।