थाना निर्माण स्थल का ग्रामीणों ने किया विरोध

खूंटी:  न लोकसभा न राज्यसभा सबसे ऊपर ग्रामसभा, इसी तर्ज पर खूंटी जिले के मारंगहादा के ग्रामीण स्थायी थाना निर्माण स्थल का विरोध रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि मारंगहादा थाना के लिए चिन्हित जमीन में पूर्वजों के काल से ही मुंडा आदिवासी समाज पूजा पाठ करते आये हैं साथ ही पूजा स्थल पर प्रत्येक वर्ष बलि चढ़ाने की भी परंपरा चलती आ रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के पदाधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि मारंगहादा थाना मारंगहादा इलाके में ही बने। तिलमा में मारंगहादा थाना नहीं बनने दिया जाएगा। शुरुवात से ही स्थानीय ग्रामीण थाना बनाने का विरोध करते आये हैं।

बता दें कि खूंटी जिले में मारंगहादा थाना अस्थायी तौर पर संचालित है। स्थायी थाना निर्माण के लिए 2 एकड़ परती जमीन चिन्हित की गई है और कंटीले तांर से 2 एकड़ भूमि की पुलिस प्रशासन ने घेराबन्दी की है। अब ऐसे में स्थानीय मुण्डा आदिवासी पूजा पाठ और बलि चढ़ाने की परंपरा को आने वाले दिनों में भी कायम रखना चाहते हैं। उनका मानना है कि प्रत्येक पर्व त्योहार, खेती- बारी समेत अन्य अवसरों पर पहान द्वारा विशेष पूजा की जाती है। पौराणिक काल से चली आ रही जनजातीय परंपरा उक्त स्थल पर थाना के बनने से टूट जाएगी और जनजातीय मुण्डा समाज को अपने सिंगबोंगा से उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसी मान्यता है कि पूर्वजो से चली आ रही पूजा और बलि प्रथा में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। मुंडा समाज अपने धार्मिक आस्था के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहता। जबकि जिला प्रशासन के अनुसार थाना के लिए चिन्हित जमीन और सरना स्थल की जमीन अलग अलग प्लाट नंबर की जमीन है, इसलिये सरना स्थल और थाना के लिए चिन्हित स्थल पर विवाद नहीं होना चाहिए।
मारंगहादा थाना निर्माण की बातों को लेकर जिला प्रशासन ग्रामीणों से वार्त्ता करने को तैयार है लेकिन ग्रामीण एक ही बात पर डटे हैं कि यहां थाना नहीं बन सकता कोई दूसरी जगह हो तो हमलोग जमीन देने को तैयार हैं लेकिन पूर्वजो से चली आ रही पूजन स्थल को घेराबंदी नहीं करने देंगे।

आज जैसे ही जिला प्रशासन तिलमा पहुंचा स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक नेता थाना निर्माण के विरुद्ध एकजुट दिखे। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को जिला मुख्यालय बुलाया है और पूरे मामले पर संवाद कर मामले को सुलझाने के लिए तैयार है। लेकिन अब देखना होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों को समझाने में सफल होगी या ग्रामीण फिर से न लोकसभा न राज्यसभा सबसे ऊंची ग्रामसभा की तर्ज पर अपनी जिद पर डटे रहेंगे।