शिक्षाविद सलाम खान के निधन से बसंतराय में शोक की लहर

कामिल/फिरदौस की रिपोर्ट
बसंतराय: इस पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की लौ जलाने वाले महान शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुस सलाम खान के निधन से इलाके में शोक की लहर फैल गई है। उनके निधन से लोग मर्माहत हैं।

मालूम हो कि मिल्लत उच्च विद्यालय, धपरा के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक और क्षेत्र के महान शिक्षाविद अब्दुस सलाम खान का बुधवार को सुबह पश्चिम बंगाल स्थित पुरुलिया में निधन हो गया। क्षेत्र में खबर मिलते ही हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई। उनके विद्यार्थियों और चाहने वालों में भारी मायूसी देखी गई। मौसम के मिजाज को देखते हुए उनके परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार पुरुलिया में ही करने का निर्णय लिया। क्षेत्र के लोग चाह रहे थे कि जनाज़े को उनके पैतृक गांव महेशटिकरी लाया जाए, ताकि अंतिम दर्शन हो सके और जनाजे में शामिल हो सकें। लेकिन परिजनों की मजबूरी के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।
मालूम हो कि दिवंगत आत्मा अब्दुस सलाम खान के इकलौते पुत्र फैज खान पुरुलिया में ही सपरिवार रहते हैं। इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद अब्दुस सलाम खान भी पुरुलिया में ही रह रहे थे। सुबह मूल रूप से इसी प्रखंड के महेश टिकरी गांव के निवासी थे।
उनके निधन की खबर इलाके में फैलते ही शोक की लहर दौड़ पड़ी। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता मुजाहिदुल इस्लाम ने कहा है कि अब्दुस सलाम खान ने बसंतराय इलाके में शिक्षा की लौ जलाने का काम किया, जिससे अनेक गरीब बच्चे तालीम पाने में सफल रहे। उच्च विद्यालय, धपरा के प्रधानाध्यापक के रूप में उन्होंने शिक्षा जगत में अमिट छाप छोड़ी।
आजाद स्पोर्ट्स एण्ड यूथ क्लब के केन्द्रीय अध्यक्ष सुलेमान जहांगीर आजद ने बताया कि वे अल्जाइमर से पीड़ित हो गए थे। एक वर्ष पूर्व अपने पैतृक गांव महेश टिकरी आए थे, लेकिन बीमारी के कारण बहुत कुछ भूलने लगे थे। करीब 90 वर्ष की उम्र में बुधवार को अहले सुबह इस दुनिया से अलविदा कह गए। गौरतलब है कि बसंतराय क्षेत्र में माध्यमिक शिक्षा के लिए आसपास कोई विद्यालय नहीं था जहां गरीब छात्र शिक्षा हासिल कर सके। स्वर्गीय खान की कड़ी मेहनत से धपरा उच्च विद्यालय की स्वीकृति वर्ष 1977 में तत्कालीन मंत्री हेमंत कुमार झा के सहयोग से कराया गया। वह विज्ञान के बेहतरीन शिक्षक थे। महागामा प्रखंड के परसा अल्पसंख्यक उच्च विद्यालय के वर्तमान प्रधानाध्यापक मो कासीम ने बताया कि अलहाज अब्दुस सलाम खान सन 1964 से 1974 तक अल्पसंख्यक उच्च विद्यालय परसा में बतौर प्रधानाध्यापक रहे और परसा उच्च विद्यालय की नीव को ऐसे मजबूत किए कि आज तक विद्यालय अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। उनका जाना शिक्षा जगत का एक दीपक का चला जाना है।

झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ समाहरणालय संवर्ग के जिला मंत्री मुजाहिदुल इस्लाम ने कहा कि पूर्व हेडमास्टर अलहाज अब्दुस सलाम खान के निधन से दुखी हूं। मैंने अपना अभिभावक खो दिया। उनके मार्गदर्शन की वजह से ही आज मेरा छोटा भाई डॉक्टर है, जो एमडी कर रहे हैं। वहीं मेरे दो भांजे डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे हैं और एक इन्दिरागांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में काम कर रहे हैं।

बसंतराय प्रखण्ड निर्माण मंच के अध्यक्ष जमील अख्तर, ज्ञान स्थली पब्लिक स्कूल गोड्डा के निदेशक समीर दुबे ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि एक शिक्षाविद के साथ ही अब्दुस सलाम खान एक नेक दिल इंसान थे।