हमें स्वयं में यह आंकलन करने की आवश्यकता है कि पशु-पक्षियों की तरह हम अपने जीवन काल में अपने समाज को क्या दे रहे हैं- अपर समाहर्त्ता

जिला पशुपालन कार्यालय गुमला के तत्वावधान में दूध, अंडा, मांस एवं ऊन उत्पादन के न्यादर्श सर्वेक्षण हेतु गुमला जिले के प्रगणकों, पर्यवेक्षकों व पशु-चिकित्सकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्याक्रम संपन्न

बसंत कुमार गुप्ता

गुमला: कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (पशुपालन प्रभाग), जिला पशुपालन कार्यालय के तत्वावधान में दूध, अंडा, मांस एवं ऊन उत्पादन के न्यादर्श सर्वेक्षण हेतु गुमला जिले के प्रगणकों, पर्यवेक्षकों एवं पशु-चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्याक्रम का आयोजन जिला कृषि कार्यालय में किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर समाहर्त्ता सुधीर कुमार गुप्ता ने कहा कि पशु-पक्षी एवं जानवर मेरे जीवन का मुख्य आधार है। उन्होंने पशु-पक्षियों के अस्तित्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धरती पर मौजूद हर पशु-पक्षी के विभिन्न चारित्रिक गुण हैं, और हर पशु-पक्षी अपने जीवन काल में समाज को कुछ न कुछ अनोखा समर्पित करता है। इसी तरह हमें स्वयं में यह आंकलन करने की आवश्यकता है कि इन पशु-पक्षियों की तरह हम अपने जीवन काल में अपने समाज को क्या दे रहे हैं। अपने जीवन से हम समाज को क्या लाभ दे रहे हैं। हमारे आसपास पाए जाने वाले सभी पशु-पक्षियों में सौहार्द, मेहनत, मातृत्व, प्रेम, अनुशासन सहित कई भावनाएं होती हैं। आज हमें इन पशु-पक्षियों के चारित्रिक गुणों एवं भावनाओं को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। ऐसा करने से हम अपने साथ-साथ अपने समाज का भी कल्याण करने में सक्षम हो सकते हैं। आज आप सभी केवल पशु सर्वेक्षण ही नहीं कर रहे हैं। बल्कि आप एक समुचित गाँव एवं समाज के जीवन का भी सर्वेक्षण कर रहे हैं। आप इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से सर्वेक्षण हेतु जिन आंकड़ों की उपयोगिता के बारीकियों को सीख रहे हैं उन आंकड़ों की महत्ता आज जनता की समस्याओं का हल करने में बेहद सार्थक भूमिका निभा रही है। अतः आप इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से इस सर्वेक्षण कार्य को सफलतापूर्वक संपादित करें। अपर समाहर्त्ता ने मास्टर ट्रेनर को सर्वेक्षण एवं डाटा प्रविष्टि हेतु आवश्यक बिंदुओं को समेकित कर मार्गदर्शिका हार्ड कॉपी में भी प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

सर्वेक्षण की संपूर्ण जानकारी साझा करते हुए जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ.मीनू शरण ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित आई.एस.एस सर्वेक्षण (एकीकृत सैम्पल सर्वेक्षण) के माध्यम से देश के सभी ग्रामों में पशुओं द्वारा उत्पादित दूध, मांस, अंडा एवं ऊन का सर्वेक्षण किया जाता है। इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष ग्रीष्म, वर्षा तथा शीत ऋतु में चयनित ग्रामों में पशु उत्पादों एवं उनके खपत का आंकलन कर विहित प्रपत्र में राज्य स्तर पर जिलावार संकलन किया जाता है तथा राज्य से संकलित आंकड़े केंद्र सरकार को भेज दिए जाते हैं। जिसके आधार पर नीति आयोग द्वारा राज्य एवं जिला स्तर पर पशुपालन विभाग से संबंधित योजनाएं स्वीकृत की जाती हैं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर डॉ.जमालुद्दीन, राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी आई.एस.एस सर्वे झारखंड द्वारा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत एक नए ऐप की जानकारी के साथ-साथ डाटा प्रविष्टि करने के तरीकों के बारे में पी.पी.टी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। विदित हो कि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत इस नए ऐप के माध्यम से प्रगणकों, पर्यवेक्षकों एवं पशु-चिकित्सकों के द्वारा जिले के पशुओं द्वारा उत्पादित दूध, मांस, अंडा एवं ऊन के सर्वेक्षण का कार्य किया जाना है।

उपस्थिति
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर समाहर्त्ता सुधीर कुमार गुप्ता, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. मीनू शरण, जिला कृषि पदाधिकारी सत्यनारायण महतो, जिला मत्स्य पदाधिकारी दीपक कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र बिशुनपुर के वरीय सह प्रधान वैज्ञानिक संजय कुमार पाण्डेय, राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर डॉ. जमालुद्दीन राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी आई.एस.एस सर्वे झारखंड, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी सिसई डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, प्रगणक, पर्यवेक्षक, पशु-चिकित्सक सहित अन्य उपस्थित थे।