नई डिजाइन का कपड़ा तैयार करें बुनकर, होगी अच्छी कमाई: राजकुमार

– सातवां हथकरघा दिवस पर बुनकरों को किया गया प्रोत्साहित

विजय कुमार की रिपोर्ट
मेहरमा : ठाकुरगंगटी प्रखंड के मानिकपुर पंचायत अंतर्गत संचालित झारक्राफ्ट कार्यालय परिसर में शनिवार को 7वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। मौके पर झारक्राफ्ट के प्रभारी राज कुमार ने उपस्थित बुनकरों को थोड़ी और मेहनत करते हुए नया डिजाइन एवं क्वालिटी का साड़ी, शॉल, सलवार सूट, दुपट्टा, शर्ट समेत अन्य कपड़ा तैयार करने के लिए उत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि नई डिजाइन का कपड़ा तैयार करने पर बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी और बुनकरों को भी फायदा होगा। साथ ही उन्होंने सिल्क, तसर समेत अन्य कपड़ों को दिखाकर गुणवत्ता की पहचान कराई ।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में भगैया पंचायत की मुखिया माया देवी, सुपरवाइजर मनोज सिंह, स्टोर कीपर दामोदर बिहारी राम एवं राजेश राम, रंजीत राम, अमित राम, सुशांत राम, सन्नी कुमार, मोहम्मद गालिफ अंसारी, आजाद अंसारी, कुदुस अंसारी समेत दर्जनों महिला एवं पुरुष बुनकर उपस्थित थे।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के बारे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2015 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की नींव रखी थी। भारत सरकार द्वारा हथकरघा उद्योग को पुनर्जीवित करने और बुनकरों को काम प्रदान करने के लिए हर साल 7 अगस्त को इस दिन को मनाने का निर्णय लिया गया। 7 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में मद्रास विश्वविद्यालय के शतवार्षिकी महोत्सव में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्घाटन किया था।

7 अगस्त को ही क्यों

ब्रिटिश सरकार द्वारा किये गये बंगाल विभाजन के विरोध में वर्ष 1905 में कलकत्ता टाउन हॉल में शुरू किये गये स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में चुना गया था। इस साल 7वां नेशनल हैंडलूम डे मनाया गया।

बहुत प्राचीन है हथकरघा उद्योग

हथकरघा उद्योग प्राचीनकाल से ही हाथ के कारीगरों को आजीविका प्रदान करता आया है। हथकरघा उद्योग से निर्मित सामानों को विदेशों में भी खूब निर्यात किया जाता है। माना जाता है कि इस उद्योग के विभिन्न कार्यों में लगभग 7 लाख व्यक्ति लगे हुए हैं। लेकिन अगर उनकी आर्थिक स्थिति की बात की जाए तो कहा जा सकता है कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद उनकी स्थिति दयनीय ही बनी हुई है। हालांकि 2017 में सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए कहा था कि देश में जगह जगह स्थापित बुनकर सेवा केंद्रों (डब्ल्यूएससी) पर बुनकरों को आधार एवं पैन कार्ड जैसी अनेक सरकारी सेवाओं की पेशकश की जाएगी। ये केंद्र बुनकरों के लिए तकनीकी मदद उपलब्ध करवाने के साथ साथ एकल खिड़की सेवा केंद्र बने हैं। लेकिन सेवाओं का सही लाभ नहीं मिल पाने की शिकायतें भी बुनकर लगातार करते आ रहे हैं।

सरकारी प्रयास क्या रहे:

सरकार ने 29 जुलाई, 2015 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में अधिसूचित किया था। सरकार का प्रयास है कि गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और हथकरघा उद्योग का सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्तिकरण किया जा सके। सरकार कहती रही है कि वह बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यही नहीं, 2015 में जब राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत हुई तब कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने हथकरघा पर बने परिधानों को लोकप्रिय बनाने और बुनकर समुदाय को मदद पहुंचाने के लक्ष्य के साथ सोशल मीडिया पर ‘आई वियर हैंडलूम’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसका कई मशहूर हस्तियों ने जमकर समर्थन किया था। इस अभियान के तहत मशहूर हस्तियों ने आई वियर हैंडलूम हैशटैग के साथ हैंडलूम वस्त्र पहनी हुई अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थीं।