ना भूख की चिंता ना प्यास की, चिंता है तो बस मरीज़ों की जान बचाने की

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो: देश कोविड के महामारी के दौर से गुजर रहा है। डॉक्टर से लेकर सुरक्षाकर्मी तक 24 घण्टे अपना योगदान दे रहे है, लेकिन कुछ ऐसे कर्मी भी है जो इस महामारी से लड़ने में अपना जो योगदान दे रहे है उनपर किसी की नज़र नही पहुँची है।
बोकारो स्टील कारखाना के ऑक्सीजन प्लांट में कार्यरत मज़दूर कोरोना संकमण के मरीजों के थमती सांसो को टूटने से बचाने के लिए भूखे रहकर अपना योगदान दे रहे है। दोपहर का टिफिन घर से लेकर आये यहाँ कार्यरत मज़दूरों को टिफन खाने की भी सूध नही है। कोई याद दिलाता भी है तो ये मज़दूर कहते है कि जबतक 50 टन ऑक्सीजन की फिलिंग नही हो जाती तबतक कोई भूख प्यास नही है। एक मज़दूर से जब हमने पूछा तो उसने कहा कि ऐसे वक्त में अगर मेरे किस्मत मर मरीज़ों की जान बचाने में छोटा सा योगदान करने का मौका मिला है तो उसमें भी मैं वक़्त जाया क्यो करू, वक़्त है इंसान होने के फ़र्ज़ निभाने का।