क्यो चमकने से रह गया सितारा

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो:  कहते है ना वक़्त से दिन और रात कौन जाने किस घड़ी वक़्त का बदले मिज़ाज़। ज़ी हॉ यही हुआ है बोकारो के सेक्टर 12 बिरसबसा के मशहूर धनुधर दीपक सवैया के साथ। अपनी अदभुत तीरंदाज़ी क्षमता के बदलौत दर्जनों मेडल जीतने वाले दीपक के पिता की हुई मौत से उसकी ज़िन्दगी में बिलकुल अंधेरा छा गया। कभी लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में माहिर दीपक की ज़िंदगी आज लक्ष्यविहीन हो चुकी है, बहुत ही बुरे आर्थिक हालात से जूझ रहा दीपक और उसका परिवार। लेकिन आज इस मुश्किल घड़ी कोई उसके साथ खड़ा है तो है उसकी माँ। माँ और उसकी ममता होती ही है कुछ ऐसी ही। परचून की दुकान चलाकर बेटे को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने में उसका होंसलाफ़जयी कर रही है। वही दीपक भी अपना सपना पूरा करने के लिए दिहाड़ी मजदूर का काम कर घर के आर्थिक हालात को बेहतर बनाने में जुटा है।
दीपक अबतक राज्यस्तरीय झारखंड तीरंदाज़ी प्रतियोगिता में सिल्वर, वर्ष 2015 स्कूल आर्चरी चैंपियनशिप में पाँच गोल्ड मेडल, ए जी एफ आई आर्चरी चैंपियनशिप 2016 में तीन सिल्वर एक कांस्य, राज्यस्तरीय तीरंदाज़ी प्रतियोगिता 2017 में दो कांस्य, एस जी एफ आई नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप में एक स्वर्ण एक सिल्वर, वही नेशनल वनवासी आर्चरी प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल कर चुका है।
लेकिन यह होनहार खिलाड़ी आज ज़िन्दगी के इस ज़द्दोज़हद से हार मानने को तैयार नही है, दीपक कहता है कि आज नही तो कल हालात सुधरेंगे और मैं अपनी लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में सफल होऊँगा। उन मान्यवरो से दीपक को एक शिकायत भी है जिन्होंने मेडल जीतते वक़्त उसके साथ फोटो खिंचवाने में गौरवान्वित महसूस करते थे आज तक उनमे से कोई भी उसकी सुध लेने नही आया। दीपक सरकार सहित स्थानीय प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठा है कि उसे कोई भी छोटी सी ही नॉकरी मिल जाती है तो दुनियाभर में तीरंदाज़ी का परचम लहराकर भारत का नाम रौशन कर सकू यही मेरी एकमात्र तमन्ना है। जिलेभर में कई स्वयंसेवी संगठन और एन जी ओ मौजूद है लेकिन उनमें से भी कोई दीपक को वक़्त के थपेड़ों से बचाने आगे नही आया है।