दीपक सवाल की 9वीं पुस्तक ‘मददगार मुरारका’ का हुआ विमोचन

बोकारो से जय सिन्हा

बोकारो : बोकारो के जाने-माने पत्रकार व लेखक दीपक सवाल की 9वीं पुस्तक ‘ मददगार मुरारका…(गोपाल मुरारका)’ का विमोचन समारोह मंगलवार को चास स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित हुआ. लोकप्रिय शिक्षाविद डॉ अशोक सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि पुस्तक का विमोचन किया. उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि ऐसी पुस्तके समाजसेवा से जुड़े लोगों के लिए प्रेणादायक। यह पुस्तक चास के प्रसिद्ध सामाजसेवी गोपाल मुरारका के जनसेवी कार्यों पर केंद्रित है जो 30 वर्षों की उनकी सेवा को दर्शाता है।. लेखक दीपक सवाल ने कहा कि लोग अपने अधिकार की बात को बहुत बढ़कर कर करते हैं. उसके लिए लड़ते भी हैं. पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी कमोबेश निभा ही लेते हैं, पर जब सामाजिक जिम्मेदारियों की बात आती है तो अक्सर लोग पीछे भागने लगते हैं. उन्होंने कहा कि गोपाल मुरारका ने पिछले तीन दशक में जनसेवा के जो कार्य किया, वह बोजोड है. इस पुस्तक में उनके कुछ कार्यो को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि दूसरे लोग भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझे और गरीबों-जरूरतमंदों की सेवा में अपना हाथ बढ़ा सके.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ अशोक सिंह ने कहा कि गोपाल मुरारका समाजसेवा के क्षेत्र में एक आदर्श हैं. इन्होंने तीन दशक तक निःस्वार्थ भावना से हजारों लोगों की मदद की है. समाज मे इनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहग. इनके कार्यो से सीख लेकर दूसरों को भी जरूरतमंदों की सेवा के लिए आगे आना चहिए. उन्होंने गोपाल मुरारका पर केंद्रित यह पुस्तक कई मायने में महत्वपूर्ण है. इसके हर पन्ने लोगों में समाजसेवा की ललक पैदा करेगी. उन्होंने इस तरह की पुस्तक की रचना के लिए लेखक की प्रशंसा करते हुए बधाई दी. कार्यक्रम को डॉ यू मोहंती व अशोक अश्क ने भी संबोधित किया. मौके पर चास महिला कॉलेज की सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ मंजू झा, चास के निवर्तमान डिप्टी मेयर अविनाश कुमार, समाजसेविका प्रगति शंकर, संजय सोनी, डॉ दीपिका, योगो पूर्ति, पप्पू चौधरी, अनूप पांडेय, रंजीत कुमार, नीरज सिंह, सरिता मुरारका, मिठू सवाल समेत काफी संख्या में चास-बोकारो के प्रबुद्ध नागरिक एवं मीडियाकर्मी मौजूद थे. इससे पहले लेखक ने मुख्य अतिथि का स्वागत बुके औए शॉल देकर किया. जबकि, मुख्य अतिथि ने लेखक को शॉल व बुके देकर सम्मानित किया. संचालन किशोर एवं धनयवाद ज्ञापन गोपाल मुरारका ने किया।