बारा शवदाह गृह का निर्माण गुणवत्ता पूर्ण नहीं : सुरेश कुमार 

छतरपुर से छोटू कुमार की रिपोर्ट

छतरपुर: नगर पंचायत छतरपुर के अंतर्गत वार्ड संख्या 04 में झूमेला नदी तट पर स्थित नवनिर्मित शमशान घाट पर भोलाराम का दाह संस्कार किया गया। इनके परिवार वाले काफी शोकाकुल थे परंतु फिर भी उपस्थित लोगों ने ढाढस बढ़ाया। लोगों ने बताया कि हम लोगों ने इस नदी पर वर्षों से अपने पूर्वज को अंत्येष्टि के लिए आते हैं परंतु गर्मी और ठंड के दिनों में तो किसी प्रकार गुजारा हो जाता था परंतु वर्षा के दिनों में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। अंत्येष्टि के लिए आए परिजन व हम आम जनता को बारिश का सामना करना पड़ता था। परंतु अपने पार्षद तथा नगर पंचायत की कोशिशों से यहां घाट बनना संभव हुआ। शव दाह निर्माण कि गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं होने से अभी से ही छत के शीट निकल गए है और भी बहुत सारी गड़बड़िया फ्लोर और फिनिशिंग से सम्बंधित है। साथ ही मौके पर उपस्थित लोगों ने बताया कि आर्थिक रुप से गरीब शोकाकुल परिवार को हम सभी के द्वारा आर्थिक मदद के लिए एक प्रयास होना चाहिए और इसे दोहराते हुए लोगों ने आगे आया तथा मृतक के नाबालिग बेटे को आर्थिक सहयोग के लिए हाथ आगे बढ़ाया। शोक की ऐसी घड़ी में बसपा जिला सचिव और नगर पंचायत छतरपुर के भावी अध्यक्ष प्रत्याशी श्री सुरेश कुमार को पाकर उपस्थित लोगों ने आभार प्रकट करते हुए कहा की चुनाव के दिनों में बहुत सारे हमारे समाजसेवी हमदर्द बन कर सामने आते हैं परंतु आप ऐसे शख्स हैं जो कि बिना कोई स्वार्थ के हम सब के साथ खड़ा हुए। सुरेश कुमार ने बताया कि जब तक हम एक दूसरे का मदद नहीं करेंगे तब तक सर्वांगीण विकास संभव नहीं हो सकता। खासकर समाज के पढ़े लिखे बुद्धिजीवी तथा आर्थिक रूप से संपूर्ण लोगों से निवेदन पूर्वक हम आग्रह करना चाहते हैं कि ऐसे संकट के समय शोकाकुल परिवार के साथ हम सबको कदम से कदम मिलाकर चलने का जरूरत है। तथा पुराने वैसे रूढ़िवादी परंपराओं को त्याग करना चाहिए जो हमें गरीबी की गर्त में धकेल रहा हो। क्योंकि पुराने समय में बहुत से ऐसे नियम था जिन्हें आज का समाज नहीं दोहराता। क्योंकि यह सत्य है कि जो लोग इस धरती पर जन्म लेता है सभी को एक दिन मरना है परंतु मरने के बाद मृतक व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए परंपरागत दान जैसे बछिया दान, सेजिया दान, और न जाने क्या-क्या ऐसे कर्मकांड है जो समाज को गरीबी और कर्ज के गर्त में धकेल देता है। खासकर आर्थिक रूप से गरीब परिवार को इन सब से बचकर कार्यक्रम करना चाहिए । साथ ही मृत्यु भोज का भी कार्यक्रम होता है मैं इस पर टीका टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। परंतु मृत्यु भोज से बेहतर यह होता है कि आप शोक सभा का आयोजन करें। जिसमें हम सब उपस्थित होकर शोकाकुल परिवार के साथ मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। नीरज कुमार, कृष्ण कुमार ,रोहित कुमार दास , जितेंद्र कुमार, सुजीत कुमार, अरविंद राम, नौरंगी राम, इत्यादि लोग मौके पर उपस्थित।