ई-पास को लेकर हो सकती है किसानों और विक्रेताओं की परेशानी

सब्जी की किल्लत की आशंका ,मुखिया को अघिकार देने की मांग

बसंत कुमार गुप्ता
गुमला : रविवार से सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन होने की वजह से सब्जी उत्पादकों और फुटपाथ या डेली मार्केट में बहुत ही कम दुकानें लगी। पुलिस के अघिकारी और जवान लाठी लेकर पहरा दे रहे हैं और ई-पास मांग रहे हैं।एक तो कोरोना संक्रमण का खतरा और पुलिस एवं परिवहन विभाग की सघन जांच से सब्जी उत्पादकों की चिन्ता बढा दी है। राज्य सरकार और प्रशासनः द्वारा सब्जी उत्पादन से आर्थिक स्वाबलंबन के दिखाए गए रास्ते पर चलकर किसानोन अपनी पूंजी लगायी थी,श्रम किया था। भीषण गर्मी में खून सुखाकर कर और पसीना बहाकर खेतों में हरियाली बनाए हुए हैं। खेतों लौकी,नेनुआ, झिंगी,करैला,टमाटर, भांजी साग,पालक,पत्ता गोभी,बोदी और फरबीन आदि की फसल लगाकर बाजार लाकर बेचने का काम करते रहे हैं। जब से सरकार ने लाकडाउन लगाया, तब से खेतों पर थोक व्यापारियों का पहुंचना कम होते गया।साइकिल, आटो और मोटरसाइकिल पर किसान जिला मुख्यालय,प्रखंड मुख्यालय में लाकर बेचना आरंभ किया था। आवश्यकता से अघिक उत्पादन होने और मांग कमने की वजह से सब्जियों के भाव में लगातार गिरावट आती गयी। राज्य के बाहर राउरकेला और छत्तीसगढ़
के बाजारों में सब्जियों का जाना बंद होने से खपत घटती गयी। फिर भी उत्पादक किसान अपनी लागत पूंजी निकालने का प्रयास करने लगे। एक सप्ताह पहले नेनुआ भिंडी 40 रुपये, करैला 30 से 40रुपये बिक रहे थे,जिनकी कीमत में 30से 50 फीसदी की गिरावट आयी। बिलौती यानी टमाटर को कोई पूछता नहीं। खुले बाजार में दस रुपये में दो से ढाई किलो बेचने को बिक्रेता विवश हैं।इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि किसान कैसे दुकानदारों से बेचे होंगे। हालात यह है कि किसानों टमाटर तोडना ही बंद कर दिया। टमाटर का दाम मिलना तो दूर तोडने वालों की मजदूरी और परिवहन खर्च निकाना संभव नहीं हो पाया। लौकी का हाल यह रहा कि दस रुपये दो लौकी मिलने लगा। आंजन शिवपुर के किसान शिव उरांव,मूरकुंडा के किसान प्रमोद और बडे पैमाने पर टमाटर, लौकी की फसल लगाने वाले बताते हैं कि सब्जी से आर्थिक संपन्नता का जो सपना देखा था,वह सपना ही रह गया,हकीकत में नहीं बदला।

ई-पास का झमेला
इन किसानों का कहना है कि काम चलाने के लिए छोटा मोबाइल रखते हैं। रविवार से ई-पास अनिवार्य हो गया। स्मार्ट फोन है नहीं।जिनके पास स्मार्ट फोन है तो बहुतों एप लोड करना और ई-पास के लिए आवेदन करना नही जानते।वाहन से शहर जा नहीं सकते।जुर्माना भरना होगा और ई-पास नहीं रहने पर सब्जी लाकर बेच नहीं सकते।
पंचायत स्तर पर बने ई-पास
जिला कांग्रेस के वरीय उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने राज्य सरकार और जिला प्रशासनः से ई-पास बनाने के लिए मुखिया की निगरानी में पंचायत स्तर पर कैंप लगाने ,सब्जी उत्पादक किसानों,फुटपाथी दुकानदारों, ठेला चालकों,दुघ बिक्रेताओं, फल बिक्रेताओं को सूविधा देने की मांग की है।

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