नक्सली बन्द का खूंटी में मिला जुला असर

खूंटी:  भाकपा माओवादियों ने तीन दिनों का झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में बंद का आह्वान किया है। झारखंड के खूंटी में पहली बार माओवादी बंद का कोई असर देखने को नही मिला। जिले के शहरी इलाकों में लगभग सभी प्रतिष्ठान व दूकानें खुली है। नक्सल प्रभावित तोरपा में भी दुकान खुली हुई है जबकि कर्रा,अड़की,रनिया और मुरहू प्रखंड क्षेत्र पूरी तरह बन्द है। सड़के सूनी हैं। वहीं रांची टाटा एनएच 33 पूरी तरह बंद है। एनएच 33 पर किसी भी तरह की वाहनों का कोई आवागमन नही है। जबकि खूंटी जिले में आवागमन पहले की तरह जारी है लेकिन लंबी दूरी की बसों को छोड़कर लगभग सभी प्रकार के वाहन सड़को पर चल रही हैं। खूंटी पुलिस बंद को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। रांची टाटा मार्ग पर एहतियातन तमाड़ पुलिस सड़को पर मुस्तैद नजर आई। जबकि खूंटी जिले के जंगलों में सीआरपीएफ,जगुआर, सैट और कोबरा के जवान अभियान में लगी हुई है।
भाकपा माओवादियों ने कामरेड किशन जी (प्रशांत बोस) और कामरेड शीला मरांडी सहित छह लोगों की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए बंद का आह्वान किया है। माओवादियों ने 23 से 25 नवंबर तक बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश बंद को सफल बनाने की अपील की है। कुछ जगहों पर माओवादियों ने बैनर पोस्टर लगाकर दहशत फैलाने की भी कोशिश की है। बैनर पोस्टर में कामरेड पर पुलिसिया यंत्रणा व हत्या के प्रयास की बातें लिखी है। वहीं गढ़चिरौली में पुलिस द्वारा 26 माओवादियों की हत्या करने की बात समेत तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलनकारियों की मौत के विरोध में 23 से 25 नवंबर तक बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश बंद को सफल बनाने की अपील की गई है।
जिले के अड़की प्रखंड के बोहोंडा और कोचांग पंचायत क्षेत्रों में एक बार फिर नक्सली सक्रिय हो गए हैं। रविवार अहले सुबह नक्सलियों ने कोचांग कैंप को निशाना बनाया था लेकिन पुलिस की सक्रियता के कारण नक्सलियों को पीछे हटना पड़ा था। कैम्प पर हमला करने पहुंचे नक्सलियों के साथ जैप जवानों के बीच दोनों ओर से गोलियां चली थी जिससे अबतक इलाके में दहशत का माहौल है। अपुष्ट जानकारी के अनुसार माओवादियों द्वारा इन दोनों पंचायत क्षेत्रों में परचा और बड़े-बड़े बैनर लगाने की बातें भी सामने आ रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नही की गई है।