तनाव से मुक्ति को लेकर कार्यशाला का आयोजन

रामगढ़। गुरुवार को राष्ट्रीय सेवा योजना, झारखंड एवं यूनिसेफ, झारखंड द्वारा संयुक्त रुप से विषयक-महामारी के समय तनाव से मुक्ति को लेकर एक दिवसीय का आयोजन किया। कार्यक्रम का संचालन यूनिसेफ की आस्था अलंग एवं राज्य संपर्क अधिकारी डॉक्टर बृजेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय ,रांची की कुलपति डॉ कामिनी कुमार ने सभी कार्यक्रम समन्वयक,सभी जिला नोडल पदाधिकारी, सभी कार्यक्रम पदाधिकारी एवं स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भारत को विरासत के रूप में एक धनी धरोहर मिला है। जिस धरोहर में योग, प्राणायाम और साधना के द्वारा हमारे अंदर फैले नकारात्मक विचारों का अंत संभव है।
अपनी प्रबल इच्छा शक्ति से हम कोरोना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि भारत का इतिहास से रहा है असत्य पर सत्य की जीत का।
राष्ट्रीय सेवा योजना निदेशालय नई दिल्ली के सहायक कार्यक्रम सलाहकार डॉक्टर कमल कुमार कर ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि सावधानी और एहतियात बरतते हुए हमें अपने आप को रचनात्मक कार्य में लगाना है।
क्योंकि एनएसएस का इतिहास रहा है कि जब जब इस देश में संकट का बादल मंडराया है,
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक अपनी उपयोगिता संकट के काल में साबित करते आए हैं और आगे भी अपनी उपयोगिता का प्रमाण देते रहेंगे।
राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय पटना के क्षेत्रीय निदेशक श्री पीयूष विनायक परांजपे ने सभी को संबोधित करते हुए कहा की वैक्सीनेशन को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने में सभी सहयोग करें। वैक्सीन कारगर और प्रभावी है इसको लेने के बाद संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।
तनाव मुक्ति के विशेषज्ञ मिलन कुमार सिन्हा ने बड़े सरल शब्दों में सभी को अवसाद से मुक्ति दिलाने वाले विभिन्न आयामों से परिचित कराया। उन्होंने कहा अतीत इतिहास है, भविष्य एक अनकही कयास है और आज एक आनंद है और आज ही एक आस है, इसीलिए तो कहते हैं से वर्तमान।
मनोवैज्ञानिक डॉ शशि गुप्ता ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अवसाद के प्रभाव, अवसाद से बचाव, अवसाद के निवारण आदि विषयों पर वृहद चर्चा की।
साथ ही कॉविड संक्रमित हो जाने की स्थिति में आसपास के माहौल को कैसे सामान्य रखा जाए इस विषय पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम को सभी कार्यक्रम समन्वयक ने भी संबोधित किया जिसमें विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग की कार्यक्रम समन्वयक डॉ0 जॉनी रूफिना तिर्की ने बताया कि जो भी स्वयंसेवक समाज के प्रभारी की भूमिका निभाने जा रहे हैं वो पूरे सुरक्षा नियमों को अनिवार्य रूप से अपनाएंगे। अवसाद की चपेट में सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि मजदूर, कई सारे शिक्षक, व्यवसायी भी आए हैं अतः उन्हें भी लक्षित कर भविष्य में कार्यक्रम का आयोजन को बल दिया।
युवाओं के अंदर व्याप्त तनाव एवं अवसाद को समान्य करने हेतु राष्ट्रीय सेवा योजना , झारखंड एवं यूनीसेफ, झारखंड द्वारा संयुक्त रूप से ” तनाव प्रबंधन कोषांग ” का गठन किया गया है। जिसके 11 सदस्य दल का अहम हिस्सा संत कोलंबा महाविद्यालय हजारीबाग की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सरिता सिंह को बनाया गया है,
इस कोषांग के माध्यम से विश्वविद्यालय स्तरीय फिर राज्य स्तरीय वेबिनार, कार्यशाला, उन्मुखीकरण, सम्वाद, विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन वर्चुअल मोड के माध्यम से किया जाना है साथ ही विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने का सहमति बना।
धन्यवाद ज्ञापन राज्य संपर्क अधिकारी डॉक्टर बृजेश कुमार ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से यूनिसेफ के प्रियंका सिंह सिद्धू कान्हु विश्वविद्यालय दुमका के कार्यक्रम समन्वयक डॉ मैरी मार्गेट टुडू, कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ दारा सिंह गुप्ता, विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के कार्यक्रम पदाधिकारियों में डॉ खेमलाल महतो, डॉ सरिता सिंह, डॉ रजनी बड़इक, डॉ भोला नाथ सिंह,डॉ फहीम अहमद, श्री सुरेश प्रसाद, डॉ मनोज कुमार सिंह के साथ-साथ स्वयंसेवक अभिषेक रंजन, सुभ्रा कुमारी, पायल कुमारी, सृष्टि कुमारी, निर्भय कुमार, सुजाता कुमारी, ज्योति जारिका, रुचि कुमारी, आयुषी कुमारी, अंजली राज, मिनाक्षी कुमारी,स्मृति भारद्वाज, तेजवंत कुमार और मुनाजिर आलम ने सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की।