प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानून रद्द करने की घोषणा, किसान आन्दोलन की एतिहासिक जीत: किसान सभा 

क़ृषि कानून रद्द करने एवं एम,एस,पी,की गारंटी का कानून बनाने तक आन्दोलन जारी रहेगा
रामगढ़: अखिल भारतीय किसान सभा झारखंड के महासचिव महेंद्र पाठक , अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हीरा गोप, किसान संग्राम समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गोप के नेतृत्व में रामगढ़ के सुभाष चौक में गगनभेदी नारे के साथ जुलूस निकालकर तानाशाह मोदी सरकार की हार एवं किसान आंदोलन की जीत पर मिठाइयां बांटी गई एवं बम पड़ाका छोड़कर खुशियां जाहिर की गई।, नेताओं ने कहा की एमएसपी की कानून बनाने ,बिजली बिल 2020 सुबह वापस लेने तक ए आंदोलन जारी रहेगा ,नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जबसे गद्दी में आई है,तबसे किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों को प्रताड़ित करती रही है। पूर्व में भी भूमि अधिग्रहण कानून में अध्यादेश के सवाल पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समक्ष तानाशाह को झुकना पड़ा था ,इस बार भी 1 साल से चल रहे किसान आंदोलन के सामने मोदी सरकार को झुकना पड़ा ,लेकिन जब तक संसद के अंदर कानून की वापसी के लिए पूरी तैयारी नहीं की जाती है ,।तब तक आंदोलन की वापसी नहीं होगी, लगातार आंदोलन जारी रहेगा ,लोगों ने संघर्ष की जीत पर मिठाइयां बांटी और एक दूसरे को गले मिलकर बधाइयां दी, ।जारी कर कहा की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानून रद्द करने की घोषणा , किसान आन्दोलन के एतिहासिक एक साल तथा 700 किसानों की शहादत की जीत है। कृषि कानून रद्द करने एवं किसानों के फसलों का एम,एस,पी,का कानून बनाने तक आन्दोलन जारी रहेगा।26 नवंबर 2021 को किसान आन्दोलन के एक साल पूरे होने के अवसर पर देशव्यापी राज्यों की राजधानियों में किसान मार्च व रैली होगी।
किसान आन्दोलन के करीब 700 किसान शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।लखिमपुर खीरी की किसान हत्याकांड के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेवार है। दोनों नेताओं ने कहा प्रधानमंत्री के किसान विरोधी तीनों काला कानून के वापस लेने का लाल झंडा स्वागत करता है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मांग करती है कि किसान आंदोलन मैं किसानों पर किए गए मुकदमे को वापस लिया जाए शहीद किसानों के आश्रितों को एक करोड रुपए मुआवजा दिया जाए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए एवं बिजली बिल 2020 वापस लिया जाए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 के भूमि-अधिग्रहण अध्यादेश को देशव्यापी किसान आन्दोलन के दबाव में मोदी सरकार को वापस लेना पड़ा था। भारत के अन्नदाता किसानों का एतिहासिक किसान आन्दोलन पूरे विश्व के किसान आन्दोलन को उर्जा देगा।जब भी किसान लड़ा है,जीता है।
मोदी सरकार का किसान आन्दोलन को बदनाम करने,कूचलने, बौडर में कील ठोकने,पानी बिजली काटने , किसान नेताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने का नापाक साजिश काम में नहीं आया। बल्कि किसान आन्दोलन के दौरान हुए विधानसभा चुनावों एवं उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा।5 राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों में किसान आन्दोलन के चलने भाजपा की हार की आहट के कारण बना कृषि कानून रद्द करने की घोषणा।
किसान जीतेगा तो ,देश जीतेगा, किसान आन्दोलन के शहीदों का ख़ून बेकार नहीं जाएगा।
किसान- मजदूर एकता जिंदाबाद।