भाकपा ने किया पीएम मोदी का पुतला दहन

गुमला: आज देशव्यापी कृषि आंदोलन के 7 महीने गुजर जाने के अवसर पर कृषि कानून के विरोध में कोविड19 को पालन करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद द्वारा कार्तिक उरांव कॉलेज के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया गया इसका नेतृत्व कामरेड बसंत गोप ने किया ‌। विदित हो कि केंद्र सरकार ने कारपोरेट घरानों के हित में रखकर नए तीन कृषि कानून को बनाया है जो किसान के साथ-साथ अन्य तबकों के लिए हानिकारक सिद्ध होगा। पूंजीवाद के समर्थक दक्षिणपंथी पार्टी भाजपा देश के किसानों को गुलाम बनाने का काम कर रहा है यह देश हित के लिए नहीं है। नया कृषि कानून से किसान अपने खेतों में ही मजदूर बन जाएंगे। बड़े पूंजीपति वर्ग किसानों की जमीन पर कॉन्ट्रैक्ट लेकर उनके अनुसार फसल का चयन करेंगे जो किसानों के हित में नहीं है। किसान अपने जमीन के स्वामित्व के अधिकार से वहीं होने की पूरी पूरी संभावना बन जाएगी। यह कानून किसानों के स्वतंत्रता के अधिकार पर हनन करता है। उक्त बातें पुतला दहन के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड बसंत गोप ने कही। इस अवसर पर राज्य से आए कामरेड केडी सिंह और किसान नेता ने कहा की आज पूरे देश में किसानों के प्रति सरकार असंवेदनशील है लगातार महंगाई बढ़ रही है किसानों की जमीन को छेड़ने के लिए अपने चहेते पूंजी पतियों को किसानों के जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए तीनों कृषि भी लाया गया है यह कानून पूर्ण रूप से पूंजीपतियों को लाभ देती है। केंद्र की सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी मान्यता ना देखना इसका उदाहरण है। आज किसान अपनी फसलों को ओने पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है और दूसरी ओर यह काला काला कृषि कानून किसानों को मझधार में खड़ा कर दिया है जो आज चिंता की विषय है। आज पूरे देश के किसान संगठनों ने दिल्ली के क्षेत्रों पर यह कानून को वापस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन केंद्र की सरकार पूंजी पतियों को नाराज नहीं करने के लिए किसानों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है चुंकी भाजपा की सरकार पूंजी पतियों की रहनुमा पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि इस कानून से समर्थन मूल्य खरीद जो पहले से ही संतोषजनक नहीं है, उसे बंद कर एफ सी आई के भण्डारण को धीरे धीरे बंद कर दिया जायेगा जिसकी सीधे तौर पर जन वितरण प्रणाली पर होगा जिससे आम जनता भोजन के अधिकार से दूर हो जाएगी। यह मानवता के खिलाफ कार्रवाई होगी। केंद्र सरकार विश्व व्यापार संगठन के निर्देश के व शर्त को पूरा करने में लग गए हैं इसके तहत देशी विदेशी कंपनियों बड़े पूंजीपति वर्ग को किसानों के आजिविका के साधनों पर कब्जा करने की कानूनी छूट दी जाएगी। आज भी किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है कृषि लागत बढ़ रही है । खाद बीज डीजल कीटनाशक दवा कृषि यंत्रों महंगा हो गया है। फसलों की लाभकारी मूल्य तो दूर समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है। किसान कर्ज और महंगाई से त्रस्त होकर पिछले 20वर्षो में लगभग 5 लाख आत्महत्या कर ली है जो चिंता का विषय है। इस अवसर पर पुग्गु पंचायत के मुखिया कामरेड बुध्दू टोप्पो बुधराम उरांव बसंत गोप उपस्थित थे।