21 वर्षों के बाद भी झारखंड आंदोलनकारियों के सपने धुंधली : पुष्कर महतो

बुधवा उरांव जैसे आंदोलनकारियो के बदौलत ही झारखण्ड अलग राज्य हुआ है : केवट

बुधवा उरांव की पुण्यतिथि पर आज बुडमू खलारी रोड़ पर प्रतिमा का अनावरण

रांची:  झारखंड आंदोलनकारी व भाकपा माले नेता बुधवा उरांव की पुण्यतिथि पर आज बुडमू खलारी रोड़ में इनकी प्रतिमा को अनावरण करते हुए स्थापित किया गया । इस मौक़े पर भाकपा माले बुढ़मू कमिटी द्वारा आज संकल्प मार्च निकाला गया। यह मार्च बाजार टांड़ से शुरु होकर मेन रोड थाना चौक होते हुए स्मारक स्थल पहुंचा। झारखंड आंदोलनकारियों व लोगों ने उनकी प्रतिमा पर , श्रद्धा सुमन, माल्यार्पण और मौन श्रद्धांजलि अर्पित किये गए । मूर्ति का अनावरण महिला नेत्री चांदनी उरांव ने किया। तत्पश्चात झारखण्ड की लोक गायिका सीमा साहू द्वारा प्रस्तुत जनगीत नमन करो न,
झारखंड के माटी धूरा माथे राखो ना व सावधान रहबा रेे झारखंडी जवान, से संकल्प सभा की शुरूआत की गई। श्रद्धांजली संकल्प सभा को सम्बोधित करते हुए माले जिला सचिव भुवनेश्वर केवट ने कहा कि बुधवा उरांव जैसे शहीदों और आंदोलनकारियो के बदौलत ही झारखण्ड अलग राज्य का सपना साकार हुआ है। खेती किसानी,भोजन, और शिक्षा का आधिकार पर कंपनियों का नियंत्रण कायम कर केंद्र सरकार देश को अधुनिक गुलामी की तरफ़ ढकेल रही है। किसान आंदोलन देश में दूसरी आजादी का आनोलन है ,। आज जंगल जमीन खनिज और जनाधिकारो के लिए आंदोलन तेज़ करके ही अलग राज्य का सपना साकार कर सकते है।
झारखण्ड आंदोलनकारी प्रवक्ता पुष्कर महतो ने कहा कि 21वर्षों के बाद भी झारखंड आंदोलनकारियों के सपने धुधंली होती जा रही है। बड़ा चिंतनीय है। अपराधी नोकरशाह और पुलिस गठजोड़ के खिलाफ लड़ाई करके ही झारखंड को बचाया जा सकता है। माले नेता जगरनाथ उरांव ने कहा कि झारखंड को कंपनियों के लूट का अखाड़ा बनने से रोकना होगा। अलग राज्य की मूल भावनाओ के अनुरुप झारखंड को गढ़ने के लिए एक और बड़े आंदोलन की जरुरत है। मौके पर झारखंड आंदोलनकारी सुखदेव भगत ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को अपने मान-सम्मान पहचान नियोजन व पेंशन के लिए एक लड़ाई और लड़ने की जरूरत है, इसकी तैयारी जोर शोर से चल रही है।
समिति के सचिव के किशोर खंडित ने अध्यक्षाता की। मौके पर भाकपा जिला कमिटी सदस्य महावीर मुंडा, शांति सेन, आइती तिर्की, अलमा खलखो, रामकिशन लोहारा, अब्दुल हमीद ,मेवा उरांव, राम किशुन प्रीतम उरांव, लोहारा, राम नारायण कुशवाहा, समाजिक कार्यकर्ता, हरदेव साहू ,भीम साहू , सुखदेव उरांव, संतोष राम, ज्जोतिंद्र मुंडा,आदि ने मुख्य रूप से संबोधित किया।