हौसले की उंची उड़ान, खेत मजदूरी से लेकर दुकान मालिक का मालती ने किया सफर

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो:  जिला मुख्यालय बोकारो से 15 किमी दूर चास प्रखंड़ के पिण्ड्राजोरा पंचायत अंतर्गत पिण्ड्राजोरा गांव में एक हार्डवेयर की दुकान चर्चा का विषय बना है। क्योंकि आम तौर पर इस तरह के दुकान का संचालन पुरूष वर्ग करते है। लेकिन यहां ऐसा नहीं है इस दुकान की कमान आधी आबादी ने संभाला है। 40 वर्षीय मालती देवी पिछले कई माह से इस दुकान का सफल संचालन कर रही है। उनके इस पहल को गांव के लोग भी काफी सराह रहे है। ग्रामीण महिलाएं भी उनसे प्रेरित होकर स्वनिर्भर की राह पर चलने को प्रयासरत है।
कुछ माह पहले तक मालती देवी अपने घर – गृहस्थी के दायित्वों का निष्पादन करने के लिए आस – पास के खेतों में मजदूरी व अन्य कार्यों को करती थी। लेकिन, इससे सब कुछ नहीं हो पाता, आर्थिक तंगी दरवाजे पर हमेशा दस्तक देती रहती। उसे कुछ सम्मान जनक एवं बेहतर आमदनी वाला काम करना था जिससे घर गृहस्थी से जुड़े सभी दायित्वों को वह आसानी से पूरे कर सके। इसी क्रम में वह गांव में गठित हो रही उड़ान आजीविका सखी मंडल से जुड़ी और फिर पिणड्राजोरा आजीविका महिला ग्राम संगठन*से जुड़ना हुआ। मालती ने अपने कुछ करने की इच्छा ग्राम संगठन एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहूड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के प्रखंड प्रतिनिधियों को बताया। जिसके बाद मालती के हौसले को देखते हुए घर की देहरी से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया। पैंसों का इंतजाम कैसे होगा इसका रास्ता बताया।

मालती के हौसलें को पंख लग चूकें थे। वह बताती है कि ग्राम संगठन एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहूड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के सहयोग से मैंने हार्डवेयर का दुकान खोलने का निर्णय लिया। ग्राम संगठन द्वारा प्राप्त सीसीएल(कैश क्रेडिट लिकेंज) ऋण के तहत उसे 50 हजार रुपए की ऋण उपलब्ध कराई गई। आर्थिक मदद मिलने के बाद उसने अपने लक्ष्य को पाने का दौड़ लगाया और वह सफल हुई। उसने देखा की गांव में हार्डवेयर की दुकान आस – पास नहीं है। इसलिए उसने हार्डवेयर का ही दुकान खोलने का निर्णय लिया। घर के समीप ही हार्डवेयर की दुकान खोला, जो आज दीदी हार्डवेयर दुकान के नाम से मशहूर है।

मालती कहती है कि वह आज जो कुछ भी है उसमें उसकी मेहनत एवं ग्रामीण विकास विभाग के जेएसएलपीएस की अहम भूमिका है। उसे हर कदम जेएसएलपीएस का साथ मिला। समय – समय पर अधिकारियों का मोटिवेशन, प्रशिक्षण, लेखा संधारण की जानकारी एवं सफल होने की प्रेरणा मिली।

मालती बताती है कि दुकान संचालन से उसे प्रतिदिन पांच से आठ सौ रुपए की वर्तमान में कमाई हो रही है। अब घर – गृहस्थी का पहिया पहले से बेहतर घूम रहा है। उम्मीद है आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। हर कदम परिवार का भी साथ मिल रहा है।