मनरेगा: बागवानी योजना के नाम पर किया गया धोखा

– महागामा प्रखंड में मनरेगा योजना के नाम पर राशि की लूट जारी
जावेद अख्तर की रिपोर्ट
हनवारा:महागामा प्रखंड क्षेत्र में महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना के क्रियान्वयन के नाम पर सरकारी राशि की लूट जारी है। जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं की जांच नहीं कराए जाने के कारण सरकारी अधिकारियों एवं बिचौलियों द्वारा डटकर कागज पर काम करते हुए राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। कोयला पंचायत के बिशनपुर गांव में मनरेगा के तहत कागज पर बागवानी करते हुए राशि की निकासी कर ली गई है।बागवानी में न लगा आम का पेड़,न हुई कोई फसल,बंजर रह गई जमीन। कोयला पंचायत के ग्राम बिशनपुर में लगभग 5 महीने पहले मो यासीन, पिता स्व० सखावत के एक बीघा जमीन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत योजना संख्या 8/2021 कि सरजमीनी स्थिति सरकारी व्यवस्था की पोल खोल रही है। इस योजना अंतर्गत एक लाख 53 हजार 587 रुपये की लागत से बागवानी का कार्य किया गया था। लेकिन बागवानी लगाने के समय विभाग के अधिकारी द्वारा काफी अनियमितता बरती गई ।
यासीन बताते हैं कि उनकी निजी जमीन पर विभागीय बागवानी का काम किया गया। योजना के नाम पर बमुश्किल 25 से 30 हजार रुपये खर्च किया गया और सारी राशि का बंदरबांट कर लिया गया। जमीन मालिक यासीन जब रोजगार सेवक या जेई को कहते थे कि बागवानी की अच्छे तरीके से घेराबंदी कीजिए और अच्छे आम का पौधा लगाएं, तो इनलोगों के द्वारा सीधा पल्ला झाड़ लिया जाता रहा। रोजगार सेवक या कनीय अभियंता के द्वारा जमीन मालिकों को किसी तरह की जानकारी नहीं दिया जाता था। उनके द्वारा बोला जाता था कि आपको बागवानी से काम है न। फिक्र नहीं कीजिए, आपका बागवानी लग जायेगा।
यासीन ने बताया कि न बागवानी का अच्छा से घेराव किया गया और न ही अच्छा पौधा लगाया गया। उनके साथ विभाग के अधिकारी के द्वारा छल कपट किया गया । जिस कारण उनकी जमीन खाली पड़ी हुई है। बागवानी में मुरझाया हुआ आम का पौधा लगाया गया, जो लगाने के 15 दिन बाद ही मर गया। उन्होंने बताया कि जिस खेत में बागवानी के नाम पर धोखेबाजी किया गया है, उस खेत में हम गेंहू, मकई, धान आदि की खेती करते थे। लेकिन हमें यह जानकारी नहीं थी कि बागवानी के नाम पर उनके साथ छल किया जाएगा। न बागवानी हुई और न फसल लगा पाए।जिस कारण उन्हें लाखों रुपये की क्षति हुई है। अगर आम का मुरझाया हुआ पौधा नहीं लगाया जाता तो कुछ हमें आस भी होता। लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने उपायुक्त भोर सिंह यादव से जांच कराते हुए कारवाई की मांग की है।

क्या कहते हैं बीडीओ

इस संबंध में जब इस संवाददाता ने महागामा के प्रखंड विकास पदाधिकारी से जानकारी लेनी चाहिए, तो उन्होंने काफी रुखा जवाब दिया। बीडीओ ने इस संवाददाता से उल्टे पूछा आप लाभुक है या पत्रकार? जब कहा कि पत्रकार की हैसियत से पूछ रहे हैं तो फोन काट दिया।

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