राष्ट्रीय लोक अदालत का हुआ आयोजन, 1403 मामलों का हुआ निस्पादन

गढ़वा से नित्यानंद दुबे की रिपोर्ट
गढ़वा : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार व राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार गढ़वा के तत्वावधान में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय गढ़वा के परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें कुल 1403 मामलों का निस्तारण कर 1,60,23083 रूपये का समझौता हुआ।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश्वर मणी, उपायुक्त राजेश कुमार पाठक, आरक्षी अधीक्षक अंजनी कुमार झा तथा वन प्रमंडल पदाधिकारी (उतरी) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत आयोजित करने का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को न्याय हासिल करने का अवसर सुनिश्चित करने के लिए मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करना है और आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण वंचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत कानूनी व्यवस्था के संचालन को सुरक्षित करने, समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने में मदद करती है।

उन्होंने उपस्थित पक्षों को प्रतिकूल मुकदमों का सहारा लेने के बजाय बातचीत और सुलह के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान के किए जाने के लिए प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए सबसे सस्ता,पैसा बचाने और समय बचाने का तरीका है और उम्मीद है कि जल्द से जल्द निपटान के लिए लोक अदालतों को और अधिक मामले भेजे जाएंगे।
डीसी, एसपी, डीएफओ (उत्तर) और बार के अध्यक्ष की ओर इशारा कर पी डी जे ने कहा कि हमारे पास मजबूत टीम है। इसी टीम की वजह से ज्यादा से ज्यादा वादों का निष्पादन करने में हम सफल हो सके हैं।
गढ़वा उपायुक्त सह विधिक सेवा प्राधिकार गढ़वा के उपाध्यक्ष राजेश कुमार पाठक तथा आरक्षी अधीक्षक अंजनी कुमार झा जी समारोह को संबोधित किया। जबकि जिला अधिवक्ता संघ गढ़वा के अध्यक्ष गौतम गौतम कृष्ण सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल तेरह बेंच का निर्माण किया गया तथा विभिन्न न्यायालयों के कुल 1403 वादों का निस्तारण कर आरोपितों से 1,60,23083रूपये जुर्माना के रूप में वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से सम्बन्धित कुल 11 मामलों का निस्तारण करते हुए मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को 51,13000 रुपये मुआवजा दिलाया गया। कुटुंब न्यायालय से 25 वादों का निस्तारण करतेे हुए 85,000 रुपये मुआवजा दिलाया गया। बैंक ऋण से सम्बन्धित मामलों का प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंकों द्वारा कुल 77 बैंक ऋण वादों का निस्तारण कर 5,00000 टोकन मनी के रूप में कर्जदारों से वसूल किया गया। प्रशासनिक न्यायालयों द्वारा 290 मामलों का प्री-लिटीगेशन स्तर पर निस्तारण किया गया।

इस अवसर पर, फैमिली कोर्ट जज अनिल कुमार मिश्रा जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज चंद्र झा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम विमलेश कुमार सहाय, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित कुमार वैश्य, न्यायिक दंडाधिकारी राजेश कुमार श्रीवास्तव, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी श्रीमती सामा रोशनी कुल्लू, न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक श्रीवास्तव, न्यायिक दंडाधिकारी रामलाल प्रसाद गुप्ता, न्यायिक दंडाधिकारी विशाल माझी, न्यायिक दंडाधिकारी मोहम्मद एच वारिस, मुंसाफ मयंक कुमार टोप्पो, कार्यपालक दंडाधिकारी सुबोध कुमार तथा स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष कमलनयन पांडे के नेतृत्व में 13 पीठ का गठन किया गया था।