वसुधा का रत्न :प्रो. राजेन्द्र यादव

इचाक से कुलदीप कुमार
इचाक : प्रो.राजेन्द्र यादव जे.एम.महाविद्यालय उरुका इचाक हज़ारीबाग झारखंड की कलम से गरीबों ,वंचितों, शोषितों , दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और देश के आम जनमानस की आवाज, सामाजिक न्याय की पुरोधा को जन्मदिवस की मंगल शुभकामनाएं।
कर्पूरी जी की मृत्यु के बाद ऐसा लगने लगा था कि दलितों ,गरीबों ,अल्पसंख्यक एवं बेसहारों की रहनुमा का स्थान रिक्त हो गया। किंतु वसुधा किसी- ना- किसी रत्न को हमेशा पैदा करती रही है ।बोधि वृक्ष की तरह अमर संदेश देने वाला एक पौधा 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में श्री कुंदन राय की छोटी सी वाटिका में उग चुका था। मां मरछिया देवी इस पौधे की रखवाली दिन रात करती रही। होनहार बिरवान के होत चिकने पात वाली कहावत इस पौधे के साथ सार्थक होने लगी ।ये दूसरा कोई नहीं बल्कि मिट्टी का अनमोल रत्न लालू प्रसाद यादव जी थे ।
वही लालू प्रसाद जी जो गणितज्ञ नहीं है लेकिन व्यावहारिक जीवन में गणित की जोड़ ,घटाव, गुना, भागा एवं भिन्न से पूर्णांक बनाने और समीकरण बैठाने में अच्छे-अच्छे गणितज्ञों को पीछे छोड़ जाते हैं ।लालू जी का पूरा व्यक्तित्व एक खुली किताब है। इनकी छवि एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में स्थापित है।
वह व्यक्ति जिस के कार्यकाल में सबसे अधिक ब्लॉक, सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालय, भारत में इकलौता चरवाहा विद्यालय ,6 विश्वविद्यालय खोलकर एक अलग कीर्तिमान स्थापित किया। लालू प्रसाद यादव की रफ्तार खुद ही सारा किस्सा बयां करती है कि समाज के बहुत बड़े वंचित वर्गों के युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए उनके अंदर क्या उमंग थी ? जिसे दुनिया मैनेजमेंट गुरु के नाम से जानती है ।बाद में कब, कैसे, क्या जाल बुने गए, क्या खेल हुए, हम सब उस से वाकिफ हैं ।ऐसे व्यक्ति को भी जाहिल ,गंवार और दृष्टिविहीन नेता के तौर पर स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *