दीवाकर की दर्द को सुनने वाला कौन, दोनो पैर से लाचार होने के बाद भी सरकारी लाभ से वंचित

लौकेश सिंह की रिपोर्ट

पांकी: पांकी प्रखंड के ताल पंचायत के अत्यंत सुदूरवर्ती गांव आबुन निवासी दोनों पैर से दिव्यांग दिकदार सिंह पिता सोमर सिंह को सरकारी लाभ की सख्त जरूरत है, दीकदार सिंह दोनों पैर से पूरी तरह विकलांग है, वे फिलहाल हाथों के सहारे ही चलते हैं,शनिवार को पत्रकारों के समक्ष अपनी व्यथा बताते हुए दिव्यांग दिकदार सिंह ने बताया कि लगभग 5 वर्ष पूर्व दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे जिसके बाद से वे आबुन गांव में ही बैठ सरकारी लाभ मिलने की बाट जोह रहे हैं बावजूद आज तक उनका विकलांग प्रमाण पत्र नहीं बन सका और ना ही दिव्यांग योजना का कोई लाभ उन्हें मिल सका, ऐसा नहीं है कि उन्होंने कोशिश नहीं की उन्होंने पंचायत के मुखिया मंजू देवी से कई बार मदद की गुहार भी लगाई ,बावजूद उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ भी नसीब नहीं हुआ, आपको बता दें कि दोनों पैर से दिव्यांग दिकदार सिंह अपनी पत्नी व तीन छोटे-छोटे बच्चों व अपनी बूढ़ी मां के साथ कच्चे एवं जर्जर मकान में रहने को विवश है।दिव्यांग होने की कहानी बताते हुए दीकदार सिंह ने बताया कि लगभग 5 वर्ष पूर्व वे मजदूरी करने गांव के ही कुछ लोगों के साथ सूरत गए हुए थे जहां पूल में कार्य करने के दौरान दुर्घटना हो गई थी व इस दुर्घटना में उनके सगे भाई समेत तीन लोगों की ही मौत हो गई थी व वे भी अपने दोनों पैर गवा चुके थे हालांकि घटना के बाद निर्माण कंपनी के लोगों ने उनका इलाज करवाया व मुआवजा के रूप में कुछ रुपए भी उन्हें मिले लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया पैसे खत्म हो गए इसी बीच अचानक लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उनके पिता सोमर सिंह की भी गंभीर बीमारी से मौत हो गई, जिसके बाद से उनके घर का सारा बोझ उनकी पत्नी गीता देवी के कंधों पर आ गई जो मेहनत मजदूरी कर घर के छह लोगों की परवरिश कर रही है, सरकारी लाभ के नाम पर मात्र राशन कार्ड ही है जिससे महीने में कुछ किलो अनाज उन्हें नसीब हो पाता है हालांकि बच्चों के आधार कार्ड न होने से बच्चों का राशन उन्हें नहीं मिलता, ऐसे में गुजारा हेतु मां का विधवा पेंशन एवं दीकदार सिंह का विकलांग पेंशन की बेहद आवश्यकता है दिव्यांग दीकदार सिंह के परिवार को सरकार के अलावा तमाम समाजसेवियों से काफी उम्मीदें हैं लेकिन उसकी तरफ किसी भी सामाजिक संस्था की नजर आज तक नहीं पहुंची, घर पर गरीबी का काला साया है ऐसे में दिव्यांग को अगर ट्राईसाईकिल समेत कुछ अन्य सुविधाएं व कुछ मदद मिल जाए तो वह जिंदगी की गाड़ी को अपनी अपंगता के पहिए से बखूबी चला सकता है।
मामले की जानकारी होने के बाद पांकी पूर्वी जिप सदस्य लवली गुप्ता ने दिव्यांग दिख दार सिंह के परिजनों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया हैl