मन की बात में केलो गांव की चर्चा नहीं होने से मीरा देवी के समूह की महिलाएं हुई उदास

खूंटी:  चार दिन से प्रधानमंत्री के मन की बात को सुनने के लिए खूंटी के रनियां प्रखण्ड के केलो गांव की महिलाएं इंतजार कर रही थीं। मन की बात की सुनने के लिए केलो गांव में व्यापक स्तर पर तैयारी की गई थी। एलईडी स्क्रीन समेत हाई रेसॉल्युशन के साउंड सिस्टम ग्रामीणों ने लगाया था। सुबह से ही मीरा देवी के प्रांगण में आसपास के ग्रामीण पहुंचे और 11 बजे से मन की बात ध्यान से सुनने लगे।
प्रधानमंत्री ने मन की बात में खुंटी जिले के रनियां प्रखण्ड के केलो गांव की चर्चा नहीं की। मीरा देवी के प्रांगण में महिलाएं और ग्रामीण सुबह से ही इंतजार में थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आकाशवाणी से मन की बात में रांची जिले के देवरी के एलोवेरा गांव की चर्चा की। कई इलाकों में बेहतर ढंग से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान की भी चर्चा की वही प्रधानमंत्री ने आर्थिक स्वच्छता पर भी जोर दिया। लेकिन खूंटी जिले के केलो गांव की मीरा देवी के समूह द्वारा बांस निर्मित उत्पादों और उनके आर्थिक संघर्ष की चर्चा प्रधानमंत्री ने नहीं की। इससे केलो गांव की मीरा देवी और आदर्श महिला कारीगर समूह की महिलाएं काफी उदास हो गयी और महिलाओं की आंखें नम हो गयी। लगातार दो- तीन दिनों से महिलाएं उत्साहित थीं कि प्रधानमंत्री मन की बात में केलो गांव की चर्चा करेंगे। लेकिन केलो गांव की चर्चा मन की बात नहीं करने से पूरे गांव में उदासी छा गयी।
बता दें कि पूर्व में मीरा देवी हड़िया बेचकर गुजर बसर कर रही थी। बाद में महिला विकास केंद्र के सामाजिक कार्यकर्त्ता सिस्टर डेफनी के निर्देशन में बांस की कारीगरी का प्रशिक्षण नामकुम से लिया। उसके बाद पूर्व सीएम रघुवर दास के कार्यकाल में दुमका में लगे बांस आधारित हुनर हाट में विदेशी कारीगरों और अन्य राज्यों के कारीगरों से आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और बांस की डिजाइनर कलाकृतियों का भी हुनर सीखा। बांस की आधुनिक कलाकृतियों के माध्यम से मीरा देवी और उसके समूह की महिलाओं ने की प्रदर्शनियों में अपनी सजावटी सामग्रियों का प्रदर्शन किया और आर्थिक रूप से सशक्त भी बनी लेकिन हाल के कोरोना काल ने महिला समूह की मार्केटिंग पर पानी फेर दिया और मीरा देवी के आदर्श कारीगरी समूह की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गयी। मीरा देवी को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मन की बात में केलो गांव की चर्चा करेंगे तो केलो गांव की बांस आधारित कलाकृतियों को नई पहचान मिलेगी। मीरा देवी के प्रांगण में आदर्श कारीगरी समूह की खुशबू देवी, सुशीला कंडुलना, पुष्पा देवी, जोसफिना कंडुलना, चंद्रशेखर गुप्ता, कोचे मुण्डा, गंगोत्री कुजूर समेत अन्य महिलाएं और ग्रामीण उपस्थित थे।