पदाधिकारियों एवं कर्मियों की शिथिलता से आंबा डैम का कार्य फंसा

गढ़वा से नित्यानंद दुबे की रिपोर्ट
गढ़वा : पदाधिकारियो एवं कर्मियों की शिथिलता की खामियाजा आम जनों को भुगतना पड़ता है। इसका उदाहरण है लगभग 24 अरब रुपए की लागत से बन रहे झारखंड सीमा से सटे उत्तर प्रदेश का अमवार डैम । प्रदेश में बेहतर सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से झारखंड सीमा से सटे उत्तर प्रदेश राज्य के सोनभद्र जिले के अमवार गांव में कनहर नदी पर बन रहे डैम (लागत करीब 2400 करोड़)का काम लगभग पूरा किया जा चुका है, केवल गेट लगाने का काम शेष रह गया है, लेकिन भू अर्जन कार्यालय गढ़वा के पदाधिकारियों एवं बाबूओं की लापरवाही की वजह से गेट नहीं लगाया जा रहा है़ चुकी सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के चार गांव भी इस डैम के डुब क्षेत्र में आये है़ं डुब क्षेत्र के अंदर आनेवाले सभी ग्रामीणों को न सिर्फ मुआवजा देना है बल्कि उनका दूसरे स्थान पर घर-जमीन देकर पुनर्वास कराना है। इसके लिये यूपी सरकार ने प्रथम चरण में 70 करोड़ रूपये भी गढ़वा जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिया है़। बताया गया कि धुरकी प्रखंड के चार गांव के अलावे झारखंड राज्य के वन क्षेत्र की कुल 799 एकड़ जमीन भी इस डैम में डूब रहा है़। डैम का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही भू अर्जन की कारवाई भी शुरू की गयी थी, लेकिन शिथिल व लापरवाह कार्यप्रणाली की वजह से डैम का निर्माण तो लगभग पूरा हो गया, लेकिन भू अर्जन कार्यालय गढ़वा लंबे समय से मुआवजा व पुनर्वास की स्थिति तय नहीं कर सका है़। साथ ही चार गांव के लोगों को कहां बसाया जाये, इसके लिये जमीन भी उपलब्ध नहीं की जा सकी है़। चुकी जैसे ही अमवार डैम में गेट लगाया जायेगा, डुब क्षेत्र के गावों में पानी भरना शुरू हो जायेगा और लोगों को उसी स्थिति में गांव से भागना पड़ेगा़ इसलिये गेट नहीं लगाया जा रहा है़।

अपनी लापरवाही में स्वयं फंस रहा भू अर्जन विभाग

भू अर्जन कार्यालय गढ़वा की लापरवाही की वजह से सरकार को करोड़ो का चुना भी लग रहा है़ साथ ही तकनिकी रूप से विभाग दिनो-दिन और पेचिदगी में फंस रहा है़ डुब क्षेत्र की जमीन को लेकर पिछले साल मार्च 2020 में ही धारा-11 का प्रकाशन किया जा चुका है़ नियमानुसार धारा-11 के प्रकाशन के तीन महीने के अंदर धारा-19 का प्रकाशन कर देना है़ । धारा-19 में रैयतों के नाम, खाता, प्लॉट सहित कुल रकबा आदि का विवरण रहता है़ इससे यह तय होता है कि किस रैयत को कितना मुआवजा का भुगतान करना है़ लेकिन भू अर्जन विभाग में इसकी गणना करनेवाला कोई एक्स्पर्ट ही नहीं है़ नियमानुसार धारा-11 के प्रकाशन के बाद जब तक रैयतों को मुआवजा नहीं दिया जाता है तब तक उन्हें रेंट आदि भुगतान करना है़। इस हिसाब से अब जब भू अर्जन विभाग ने रैयतों के मुआवजा आदि को लेकर धारा-19 का प्रकाशन नहीं कराया है, इसलिये करीब 20 महीने का लाखो-करोड़ो रूपये का रेंट विभाग को रैयतों को देना होगा़ चुकी यह लापरवाही या गलती गढ़वा जिले के भू अर्जन विभाग की है, ऐसे में यूपी सरकार इस रकम को अपने मुआवजे में शामिल नहीं करेगी, फिर यह राशि रैयतों को कौन भुगतान करेगा़ इस वजह से तकनिकी रूप से यहां विभाग फंसता हुआ नजर आ रहा है़ । साथ ही और जितना ज्यादा समय बीतेगा विभाग इस मामले में और उलझता जायेगा़ बताया गया कि विस्थापितों के लिये व्यवस्था करने सहित मुआवजे की राशि तय करने में अभी से काम शुरू हो, तो भी कुछ साल लग सकते है़ं तब तक अमवार डैम का काम यूं ही लटका पड़ा रहेगा़।

क्या-क्या मिलेगा विस्थापित लोगों को

अमवार डैम के डुब क्षेत्र में गढ़वा जिले के भूमफोर, शरू, फेफसा व परासपानी गांव डुब क्षेत्र में आ रहे है़ं इन गांव के कुल 89 रैयतों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें मुआवजा देना है और पुनर्वास करना है़ यद्यपि ग्रामीण जिला प्रशासन के इस आंकड़े को सही नहीं मानते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि रैयतों की संख्या इससे ज्यादा है़ यदि यह आंकड़ा सही भी है तो इतने विस्थापितों को मुआवजा की रकम के अलावे डुब क्षेत्र के बदले दूसरे स्थान पर पक्का मकान, खेती युक्त जमीन, सड़क, स्वास्थ्य, विद्युत सुविधा, विद्यालय आदि के साथ रहने योग्य वातावरण देना होगा़।

जल्द कराने का प्रयास करेंगे

इस संबंध में जिला भू अर्जन पदाधिकारी अमर कुमार ने बताया कि वे अभी इस विभाग में नये आये हैं, लेकिन वे इसे जल्द कराने का प्रयास करेंगे़ उन्होंने कहा कि विभाग के कर्मी अभी एनएच-75 बाईपास के काम को समाप्त करने में लगे हुये है़ं