अस्तित्व संकट झेल रहा बसंतराय का ऐतिहासिक तालाब

– लोगों ने की अतिक्रमण मुक्त एवं सौंदर्यीकरण की मांग
कामिल की रिपोर्ट
बसंतराय: प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक तालाब अस्तित्व संकट की स्थिति से गुजर रहा है। स्थानीय लोगों की लापरवाही एवं जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की उदासीनता तथा उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का तालाब अपनी प्रासंगिकता होता जा रहा है।
धार्मिक महत्त्व वाले इस ऐतिहासिक तालाब के किनारे गंदगी का अंबार लगा हुआ है जिसकी वजह से यहां पर आने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है। लगभग 52 बीघा जमीन पर बने इस तालाब के चारों ओर स्थानीय दुकानदारों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है।जिनके द्वारा हर रोज तालाब में गंदगी फैलाई जाती है।
कभी धार्मिक कार्यक्रमों का केंद्र यह तालाब आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण तालाब का पानी इतना दूषित हो चुका हैं कि पानी पीना तो दूर लोग स्नान करना भी नहीं चाहते।
जबकि पूर्व में तालाब का पानी शुद्ध पेयजल के काम में आता था। बड़ी संख्या में लोग इसके पानी को पीते थे।
इस तालाब का पौराणिक धार्मिक महत्व भी है। प्रत्येक साल 14 अप्रैल को भव्य बिसुवा मेला का आयोजन होता है। मौके पर हजारों की संख्या में सफा होड़ के अनुयायी तालाब में आस्था की डुबकी लगाते हैं। धार्मिक आस्था के कारण हजारों सनातन धर्मावलंबी भी विशुवा मेला के अवसर पर तालाब में डुबकी लगाने आते हैं। लेकिन तालाब की साफ सफाई वर्षों से नही की गई है।जबकि जिले के पर्यटन स्थलों में बसंतराय का ऐतिहासिक तालाब उल्लेखनीय स्थान रखता है।
तालाब का ऐतिहासिक महत्व भी है। बताया जाता है राजा मान सिंह ने अपने बेटी के लिए तालाब खुदवाया था। बताते चलें कि गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने तालाब के सुंदरीकरण एवं सफाई को लेकर दिलचस्पी दिखाई थी। लेकिन कार्य अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है। अगर तालाब का सौंदर्यीकरण करा दिया जाए तो पर्यटन के क्षेत्र में मिल का पत्थर साबित होगा।