समाजीकरण प्रतिमान का महत्व

विचार
हमारे विचार , बोले जाने वाले शब्द , हमारे तौर तरीके , हमारे मित्र का चुनाव ,हमारी संगति , हमारी अभिव्यक्ति प्यार विश्वास धोखा , हमारे अनुकरण के सभी पहलू आदि का संबंध हमें अपने घर / परिवार मे मिले प्रतिमान पर निर्भर करती है , व्यक्तित्व निर्माण मे माता पिता एवं परिवार के आदर्शों की भूमिका मूल्यों के संवर्द्धन का कार्य करती है ।

जिस तरह घर का वातावरण रहता है बच्चे अपने को उसी परिवेश में ढाल लेते हैं फिर जीवन भर उसका अनुकरण करते हैं अंततः उनके व्यक्तित्व में यही गुण घर कर जाती है । समान विचारधारा वाले व्यक्तित्व में ही प्रगाढ़ दोस्ती बन पाती है ।

लेखक: डाॅक्टर प्रभाकर कुमार

किसी व्यक्ति के विचारों , अभिव्यक्ति से उनके व्यक्तित्व का प्रत्यक्ष पता चलता है । व्यक्ति के जैसे दोस्त होते हैं या जिस तरह के व्यक्ति का साथ ढूंढते हैं वह व्यक्ति समान प्रकृति के होते हैं इसलिए वह दोस्त उन्हें ही बनाते हैं ।

समान आदतें वाले व्यक्ति, एक विचारधारा वाले ही सामीप्यता संबंध विकसित कर पाते हैं । व्यक्तित्व निर्माण में माता पिता के संस्कार , घर का वातावरण , संस्कृति , मित्र एवं समाजीकरण के सभी अवयवों की भूमिका होती है ।

मनोवैज्ञानिक वाटसन से व्यक्तित्व निर्माण के संशिलष्ट रूप निर्माण में वातावरण की भूमिका महत्वपूर्ण माना है वहीं जेनसन प्राकल्पना यह बात पर बल डालती है कि व्यक्तित्व निर्माण में 80 % आनुवंशिक एवं 20 % वातावरण की अंतःक्रिया होती है जिससे परिष्कृत व्यक्तित्व निर्माण होती है । बच्चे का पहला संसर्ग माता पिता , पारिवारिक माहौल से होती है इसलिए बच्चों के कुशल व्यक्तित्व परिमार्जन के लिये इनकी जवाबदेही अत्यधिक महत्वपूर्ण है और अंततः समाजीकरण के सभी अवयव की भूमिका समतुल्य होती है । राष्ट्र निर्माण में इन तथ्यों की प्रासंगिकता महत्वपूर्ण है ।

लेखक: डाॅ प्रभाकर कुमार
उपर के वक्तव्य लेखक के अपने हैं।