चक्रधरपुर शहर के विजय दा रांची में भी मानव सेवा में निभा रहे है अहम भूमिका

बंगाली एशोसिएशन के प्रदीप दा ने कहा समाजिक कार्य मे बेहत्तर सेवा कर रहे है विजय गांगुली
रामगोपाल जेना
चक्रधरपूर: बिगत 29 जुलाईको बुधराम बोइपाई उम्र 11 साल,गाव जोड़ापोखर,जिला प सिंहभुम, चाई बासा सदर हॉस्पिटल से आकर देव कमल हॉस्पिटल राँची में आपनी दोनो infected हाथो का ईलाज के लिए भर्त्ती हुआ था। महज 1 रु चुराने के लिए उसको आपनी पिताजी ने उसका दोनो हाथ खौलता हुआ पानी मे डुबो दिया था। उसका पिताजी का दो शादी था। उसका पिता मजदूरी का कार्य करते थे ।
बुध राम की मा भी दिन मजदूरी करती है। गरीबी के कारण चाई बासा सदर हॉस्पिटल से अधूरा ईलाज करवाकर वे लोग घर चले गए। धीरे धीरे ईलाज के अभाव में उसका दोनो हाथो का दसो अंगुली सड़ना चालू हो गया। इसके बाद आयुष्मान कार्ड बनवाकर उसे देव कमल हॉस्पिटल राँची भेज दिया गया। यहा उसका हाथो को बचाने के लिए दसो अंगुली को काटना पड़ा। उसके बाद पैर से मांस काट कर अंगुलियो में ग्राफ्टिंग करना पड़ा। इस पूरे प्रक्रिया मे उसका 05 ईकाई खून भी चड़ा। उसका माँ हिन्दी भी बोल नही सकता। उसका मा के हाथ में पैसा भी नही था की आपनी खाना, बेटा के लिए टॉनिक फल,दुध का इन्तजाम इस अनजान शहर में वे एकेले कैसे करे।
जानकारी मिलने के बाद समाजसेवी विजय गांगुली ने 31जुलाई को हॉस्पिटल पहुंचे और डॉक्टर नर्स से बात कर उसका ईलाज को और सुचारु तरीका से करवाने की कौशिस किया। खून की जुगाड, फल होर्लिक्स खाने के सामान,कपड़ा तथा आर्थिक सहायता आदि प्रदान किया। उसके बाद श्री गांगुली ने लगातार बुधराम के ध्यान रखें और सहायता करते रहें।
अंतत आज 29अगस्त को उसे हॉस्पिटल से छुट्टी मिला। बंगाली एसोसीयसन चक्रधरपुर ने अपनाअतंत्य सक्रिय सदस्य उग्रसेन कलायत के साथ एम्बुलेन्स भेजा, जिसमें बुधराम आपनी घर चला गया। उसका इच्छा था की नया कपड़ा पहन कर ही वो गांव में लौटेगा विजय गांगूली ने उसे नया कपड़ा भी खरीद दिया। जिससे वे बहुत ही खुश नजर आ रहा था। श्री गांगुली के साथ इस नेक काम में प्रदीप पाठक, अवियुद,रवि सहाय, ऋषिकेश, सुषमा तिर्की का सराहनीय योगदान रहा।